
अल्मोड़ा। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा द्वारा विकसित कम फाइटेट वाली जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का की संकर किस्म ‘वी एल लोफाई’ को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र के लिए अधिसूचित किया गया है। यह किस्म वी बी एल 107 और वी बी एल 109 के संयोजन से विकसित की गई है। संस्थान की ओर से बताया गया कि वी एल लोफाई एक जल्दी पकने वाली संकर किस्म है, जो 90 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है। इसमें फाइटेट की मात्रा मात्र 2.16 मिलीग्राम प्रति ग्राम पाई गई है, जबकि सामान्य मक्का में यह मात्रा लगभग 3.0 मिलीग्राम प्रति ग्राम होती है। कम फाइटेट होने के कारण इस किस्म में खनिजों की जैव-उपलब्धता अधिक रहती है, जिससे यह पोषण की दृष्टि से अधिक उपयोगी मानी जा रही है। अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों के दौरान उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में इस किस्म का औसत उत्पादन 6,046 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया। इसने टर्किकम पर्ण झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता भी प्रदर्शित की है। वी एल लोफाई को लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में खेती के लिए उपयुक्त माना गया है। संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार फाइटिक एसिड बीजों में पाया जाने वाला ऐसा यौगिक है, जो खनिजों को बांध लेता है और शरीर में उनके अवशोषण को कम कर देता है। वी एल लोफाई में इसकी मात्रा कम होने से यह मक्का सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक पोषण-संपन्न है। इस नई संकर किस्म के अधिसूचित होने से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के किसानों को उच्च उपज के साथ बेहतर पोषण वाली मक्का उपलब्ध होगी, जिससे पोषण सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
