

अल्मोड़ा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चारण के साथ हुई। इसमें डॉ. गिरीश अधिकारी, हेमलता अवस्थी और छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। योग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद भट्ट वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ. गिरीश अधिकारी ने आकाश तत्व और उपवास चिकित्सा पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपवास चिकित्सा के माध्यम से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकालकर कई रोगों में लाभ प्राप्त किया जा सकता है। द्वितीय सत्र में सूर्य किरण एवं रंग चिकित्सा का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया। छात्र-छात्राओं ने रंगीन बोतलों के माध्यम से सूर्य की किरणों को जल, तेल और खाद्य पदार्थों में समाहित करने की प्रक्रिया सीखी। तृतीय सत्र में वायु चिकित्सा और मसाज थेरेपी पर जानकारी दी गई। इसमें प्राणायाम, प्रातः भ्रमण और मसाज चिकित्सा के माध्यम से अस्थि रोग, पैरालिसिस, पार्किंसन और जोड़ों के दर्द में राहत देने के उपाय बताए गए। हेमलता अवस्थी ने प्राकृतिक चिकित्सा को सुरक्षित और प्रभावी बताते हुए इसे जीवनशैली में अपनाने पर जोर दिया। वहीं लल्लन कुमार सिंह ने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा वर्तमान समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में बताया गया कि प्राकृतिक चिकित्सा और योग की पद्धतियां वेद, पुराण, उपनिषद और आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित हैं और आज भी उपयोगी हैं। कार्यशाला में योग विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न प्रयोगात्मक गतिविधियों में रुचि दिखाई।

