
अल्मोड़ा। उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को जनता के दबाव और लोकतांत्रिक संघर्ष की नैतिक जीत बताते हुए कहा कि केवल एक मंत्री के हटने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। पार्टी ने भ्रष्टाचार, भर्ती घोटालों और अपारदर्शी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही है। केंद्रीय संयोजक पीसी तिवारी और प्रधान महासचिव नरेश नौड़ियाल ने संयुक्त बयान में कहा कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने वाले युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका संघर्ष सफल रहा और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उसी जनदबाव का परिणाम है। उपपा ने कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी नहीं होंगी, दोषियों को कठोर दंड नहीं मिलेगा और भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य को बाजार के हवाले करने वाली नीतियों का विरोध करते हुए सभी नागरिकों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाएं तथा रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग दोहराई। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर बढ़ती तानाशाही और जनविरोधी नीतियों को जनता स्वीकार नहीं करेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सड़क से सदन तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही छात्र-युवाओं, अभिभावकों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए इसे व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत बताया।
