
हरिद्वार(आरएनएस)। प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से रोके जाने को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच विवाद ने हरिद्वार में भी प्रतिध्वनि पैदा की। हरकी पैड़ी पर भारत साधु समाज और श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक धरना देकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने शंकराचार्य और उनके शिष्यों से दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध किया। श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज की घटना सनातन प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है। एक ब्रह्मचारी का तप कठिनाइयों से भरा होता है। प्रशासन ने सम्मानित पीठ के शंकराचार्य का अपमान किया है। उनके ब्रह्मचारी शिष्यों की शिखा पकड़कर खींची गई। ऐसे अफसर और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसा न करने पर शिखा कटवाने की चेतावनी भी दी। इस मौके पर स्वामी सत्यवित्रानंद, ठाकुर वीरेंद्र सिंह, समाजसेवी विनोद मिश्रा, मयंक मूर्ति भट्ट, अवशेष मारवाड़ी, विनोद मिश्रा, परवीन शर्मा, यशपाल शर्मा, महेंद्र पांडे, संजू अग्रवाल, ब्रजमोहन शर्मा, विष्णु गौड़, मनोज गुप्ता, कुलदीप शर्मा, अमोल शर्मा, रोहित शर्मा, अभिषेक शर्मा और कपिल जौनसारी मौजूद रहे। सरकार का प्रतिनिधिमंडल जाकर माफी मांगे: गिरि भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन मंत्री स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि शंकराचार्य का पद प्रशासन नहीं, बल्कि साधु-संतों की ओर से तय किया जाता है। हम प्रयागराज के घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हैं। अब तक शंकराचार्य से माफी नहीं मांगी गई, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। यूपी सरकार का कोई प्रतिनिधिमंडल उनसे जाकर माफी मांगे।

