
अल्मोड़ा। चाय की दुकान में मारपीट और जान से मारने की धमकी के एक मामले में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है। सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पाण्डेय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास मिलने पर आरोप सिद्ध न मानते हुए अपील स्वीकार कर ली। बचाव पक्ष के अधिवक्ता पी.सी. तिवारी और मनोज कुमार पंत ने बताया कि मामला 15 दिसंबर 2022 का है। अभियोजन के अनुसार राजस्व उप निरीक्षक क्षेत्र कोटुली के अंतर्गत मिरतोला स्थित एक चाय की दुकान में केदार सिंह बिष्ट के साथ कमल सिंह राणा और राजेंद्र सिंह बिष्ट ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की थी। आरोप था कि कुर्सी से हमला कर उन्हें घायल किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी और पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन यह स्पष्ट नहीं कर सका कि घटनास्थल से मात्र 500 मीटर दूर पुलिस चौकी होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज कराने में करीब पांच घंटे की देरी क्यों हुई। अदालत ने यह भी पाया कि वादी, उसके पिता के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट में महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं, जिससे अभियोजन की कहानी संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सकी। इन परिस्थितियों में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला निरस्त करते हुए दोनों आरोपियों को आरोपों से बरी करने के आदेश दिए।

