
देहरादून(आरएनएस)। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में किशोरों को स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ संस्कारों से भी पोषित करना होगा। छात्रों के समग्र विकास के लिए स्कूलों के साथ अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की सहभागिता भी बेहद जरूरी है। सोमवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम की वार्षिक परियोजना समीक्षा बैठक व कार्यशाला में शिक्षा मंत्री ने यह बात कही। आज से शुरू हुई इस चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद-एनसीईआरटी और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रषिक्षण परिषद-एससीईआरटी ने किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज के बच्चे ही देश के भविष्य के नागरिक, कर्णधार हैं। उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए उन्हें स्वत्रंत संस्कारित और तनावमुक्त वातावरण दिया जाना जरूरी है। उत्तराखंड इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। हाल में सरकार के कुछ फैसलों का जिक्र करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में बच्चों की शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष तौर पर काम किया जा रहा है। छात्रों के समग्र विकास में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अभिभावक अपने बच्चों को उज्जवल भविष्य की उम्मीद में स्कूल में छोड़ते हैं। यहां से शिक्षकों की जिम्मेदारी शुरू हो जाती है। एनसीईआरटी की कार्यक्रम समन्वयक गौरी श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक प्रो. श्रीधर श्रीवास्तव, बेसिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल, अपर निदेशक-एससीईआरटी प्रदीप कुमार रावत ने भी विचार रखे। इस दौरान सहायक निदेशक डॉ. केएन बिजलवान ,कार्यक्रम समन्वयक नीलम पवार उषा कटियार ,सुनील भट्ट, देवराज सिंह राणा, प्रो.हरीश मीणा आदि भी मौजूद रहे। कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 75 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभागी कर रहे हैं। इसमें किशोर-किशोरियों के संवेदनशील विषयों पर चर्चा की गई और उन्हें सुलझाने के लिए प्रभावी उपाय तलाशने पर विचार विमर्श किया गया।

