
अल्मोड़ा। जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा की ओर से ‘जन स्वास्थ्य पर जनसंवाद’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह निशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और सर्वसुलभ होनी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण और व्यापारीकरण को जनविरोधी करार देते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की गई। यह संगोष्ठी अल्मोड़ा स्थित राजकीय संग्रहालय में स्वर्गीय मंजू तिवारी की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय मंजू तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि मंजू तिवारी की मृत्यु किसी प्राकृतिक कारण से नहीं हुई थी, बल्कि यह त्रुटिपूर्ण चिकित्सा उपचार का परिणाम थी, जिसने वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया। संगोष्ठी में कहा गया कि उत्तराखंड में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं लगातार कमजोर की जा रही हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना की आड़ में निजी अस्पतालों द्वारा रोगियों के आर्थिक शोषण की प्रवृत्ति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर जन स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करने के लिए अपने आंदोलन को और व्यापक करेगा। कार्यक्रम का संचालन विनोद तिवारी ने किया। संगोष्ठी को संगोष्ठी के संयोजक और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह रावत, यूकेडी जिला अध्यक्ष दिनेश जोशी, आनंदी वर्मा, यूकेडी नेता शिवराज सिंह बनोला, विनय किरोला, भूपेंद्र बल्दिया, डॉक्टर रेनू, ममता, जगदीश चंद्र पांडे और गणेश चंद्र पांडे सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में एडवोकेट जीवन चंद्र, मोहम्मद वसीम, शाकिब, पान सिंह, भावना पांडेय, आशा और धीरेंद्र मोहन पंत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

