

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा की ओर से चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत शुक्रवार को भैंसियाछाना विकासखंड के सल्ला गांव में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के दिशानिर्देशों में आयोजित कार्यक्रम में 10 पुरुष और दो महिला किसानों समेत कुल 12 कृषकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जे.पी. आदित्य ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसलों से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन और उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए। किसानों को मिट्टी के नमूने एकत्र करने की सही विधि की जानकारी भी दी गई, जिससे मृदा परीक्षण के विश्वसनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकें और फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का उचित उपयोग किया जा सके। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैकल्पिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद कर गांव में कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाला नुकसान और सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब) का प्रकोप खेती की प्रमुख समस्याएं हैं। इन समस्याओं के कारण किसानों को फसल उत्पादन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. बी.एम. पांडे, डॉ. जे.पी. आदित्य और डॉ. कामिनी बिष्ट ने किया। आयोजन में संस्थान की वर्षा चौहान ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया।





