
अल्मोड़ा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद याकूब की अदालत ने तोड़फोड़ और धमकी से जुड़े एक आपराधिक मामले में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। अभियोजन के अनुसार वादिनी गोदावरी देवी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 11 जून 2025 की रात राजेंद्र सिंह महिपाल और नरेंद्र सिंह महिपाल उनके घर पहुंचे तथा तोड़फोड़ करते हुए दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने पुलिस के पास जाने पर जान से जलाकर मारने की धमकी दी और 20-20 लाख रुपये तथा संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया। शिकायत के आधार पर राजस्व पुलिस क्षेत्र डोबा में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई। विवेचना पूरी होने के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत न्यायालय ने संज्ञान लिया और आरोप तय किए। आरोपियों ने अदालत में स्वयं को निर्दोष बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया। वादिनी के निधन के बाद अभियोजन पक्ष ने उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह महिपाल तथा राजस्व पुलिस क्षेत्र डोबा के विवेचक पटवारी को गवाह के रूप में पेश किया और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दंडित किए जाने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए अपने समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयान और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। इसके आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राजेंद्र सिंह महिपाल और नरेंद्र सिंह महिपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। मामले में अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता रोहित कार्की ने पैरवी की।



