
अल्मोड़ा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के निर्देशों और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डॉक्टर लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में संस्थान में ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ के अंतर्गत 19 से 21 जनवरी तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण प्रशासनिक भवन स्थित श्रीमती गर्ट्यूड इमरसन सेन समिति कक्ष, हवालबाग में हुआ, जिसमें संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी व प्रशासनिक कर्मचारियों के साथ दोनों कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ और काफलीगैर तथा केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान मुक्तेश्वर के कुल 100 कार्मिकों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में सरकारी सेवकों में कर्तव्यबोध, सेवा भावना, नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी भूमिका को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। सत्रों के दौरान ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी’ की अवधारणा, कार्य में ईमानदारी और समर्पण, सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने तथा कार्य से संतुष्टि और परिपूर्णता प्राप्त करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि छोटे-छोटे कार्यों में भी सेवा भाव और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ ‘कर्मयोगी क्षण’ बनाए जा सकते हैं, जिससे कार्यालयी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनती है। प्रशिक्षण में यह भी रेखांकित किया गया कि सरकारी कर्मचारी प्रशासनिक और विकासात्मक ढांचे की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी कार्यशैली का सीधा प्रभाव आम नागरिक पर पड़ता है। इस दौरान आईगोट ऐप के उपयोग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निरंतर सीखने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम का समन्वय डॉक्टर पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी एचआरडी ने किया। संचालन मास्टर ट्रेनर के रूप में राजेश कुमार खुल्बे, प्रधान वैज्ञानिक तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रविंद्र सिंह नेगी रहे। प्रशिक्षण गतिविधियों में सचिन कुमार पांडे और देवेंद्र सिंह कार्की का सहयोग रहा। समापन सत्र में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कार्यस्थल पर ईमानदारी, पारदर्शिता और सेवा भाव के साथ दायित्व निर्वहन का संकल्प लिया।


