
विकासनगर। लोक सभा चुनाव नजदीक आते ही पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा गरमाने लगा है। रविवार को कर्मचारियों ने सद्भावना भवन में बैठक कर लोकसभा चुनाव तक लगातार आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। आंदोलन के पहले चरण में 11 फरवरी को धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सभी विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के ब्लॉक अध्यक्ष संतोष गडोही ने कहा कि पुरानी पेंशन लागू करने से वित्तीय भार बढ़ने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त नहीं किया है। और न ही वहां कोई आर्थिक संकट पैदा हुआ है। कई अन्य प्रदेशों ने पुरानी पेंशन बहाली की ओर कदम बढ़ाया है। हिमाचल प्रदेश इसका ताजा उदाहरण है। कहा कि कर्मचारियों को पेंशन देने से आर्थिक भार नहीं बढ़ता है। सरकार की फिजूल खर्ची से आर्थिक भार बढ़ता है। इसके साथ ही विधायिका से जुड़े लोगों की संख्या हर दो साल में बढ़ती जाती है, जिन्हें पेंशन और अन्य सुविधाओं के नाम पर भारी भरकम राशि दी जा रही है। लेकिन विधायिका से जुड़े लोगों को मतदान करने और निष्पक्ष मतदान कराकर सदन तक पहुंचाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई देशों में जन प्रतिनिधियों को पेंशन दिए जाने की व्यवस्था नहीं है, लेकिन कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन दी जाती है। जबकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सरकारी मशीनरी को चलाने वाले कर्मचारियों के साथ ही भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस भेदभाव पूर्ण रवैए के खिलाफ और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव तक आंदोलन जारी रहेगा। इसकी शुरुआत 11 फरवरी को होने वाले प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन से की जाएगी। इस दौरान एनएमओपीएस की जिला सचिव हेमलता कजालिया, शांतनु शर्मा, सुनील गुसाईं, संदीप रावत, उर्मिला द्विवेदी, परशुराम कोठारी, हर्षिता, अनिता नेगी, शिखा राठौर, रुचि पैन्यूली आदि मौजूद रहे।


