Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • एसएनबीएनसीबीएस ने किया नवजात शिशुओं में गैर-संक्रामक स्क्रीनिंग के लिए उपकरण विकसित
  • उत्तराखंड
  • राष्ट्रीय

एसएनबीएनसीबीएस ने किया नवजात शिशुओं में गैर-संक्रामक स्क्रीनिंग के लिए उपकरण विकसित

RNS INDIA NEWS 30/07/2020
shisgu

नईदिल्ली, (आरएनएस)। नवजात शिशुओं में बिलीरूबिन स्तर की सावधानीपूर्वक जांच अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (2004) के अनुसार अनिवार्य है। यह जांच एक प्रकार की मस्तिष्क क्षति जिसे किर्निकटेरस कहा जाता है, की घटनाओं को कम करने के लिए की जाती है, जिसका कारण शिशु के रक्त में बिलीरुबिन का उच्च स्तर हो सकता है। यद्यपि रक्त के केपिलरी संग्रह और उसके बाद के जैव रासायनिक परीक्षण को नवजात शिशुओं में पीलिया का पता लगाने के लिए स्वर्ण मानक माना जाता है, गैर-संक्रामक उपकरणों का उपयोग करके त्वचा के अन्दर बिलीरुबिन माप के स्पष्ट रूप से अतिरिक्त लाभ है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत स्वायत्त अनुसंधान संस्थान, एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस), कोलकाता के प्रोफेसर समीर के. पाल और उनकी टीम ने एजेओ-निओ नामक उपकरण विकसित किया है। संस्थान डीएसटी द्वारा वित्त पोषित तकनीकी अनुसंधान केंद्रों (टीआरसी) में से एक और निल-रतन सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, कोलकाता के साथ वैज्ञानिक सहयोग का संचालन भी कर रहा है। उपकरण का संचालन, अन्य बिलीरुबिन मीटर की सीमाओं से समझौता किये बिना, नवजात शिशुओं में बिलीरुबिन स्तर की माप के लिए गैर-संपर्क और गैर-संक्रामक स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीकों पर आधारित है। इसे कुल सीरम बिलीरुबिन (टीएसबी) परीक्षण के विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
एनआरएस मेडिकल कॉलेज में एसएनबीएनसीबीएस टीम द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, नव विकसित डिवाइस (एजेओ-निओ) प्रीटरम में बिलीरुबिन के स्तर को मापने में विश्वसनीय है, और नवजात शिशु के गर्भकालीन या प्रसवोत्तर उम्र, सेक्स, जोखिम वाले कारकों, आहार प्राप्त करने सम्बन्धी व्यवहार या त्वचा का रंग आदि से अप्रभावित रहता है। उपकरण देखभाल के स्थान से 10000 किमी की दूरी पर स्थित संबंधित चिकित्सक को तात्कालिक रिपोर्ट (लगभग 10 सेकंड) दे सकता है। यह पारंपरिक रक्त परीक्षण विधि की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसकी रिपोर्ट में 4 घंटे से अधिक का समय लगता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नवजात में रक्त बिलीरुबिन (हाइपरबिलिरुबिनमिया) का तेजी से पता लगाना चिकित्सीय प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि नवजात शिशुओं में केर्निकटेरस से बचा जा सके जो न्यूरो-मनोरोग की समस्याओं का कारण होता है। बाजार में उपलब्ध अन्य आयातित उपकरणों की तुलना में एजेओ-निओ में कई अन्य फायदे हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के डीएसआईआर के उद्यम राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) द्वारा डीएसटी के सचिव प्रोफेसर प्रो. आशुतोष शर्मा की उपस्थिति में प्रौद्योगिकी को विजयवाड़ा स्थित कंपनी, मेसर्स जयना मेडटेक प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित किया गया है। कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनिंदर सिंह लाल ने भारतीय प्रौद्योगिकी, जिसमें वैश्विक बाजार में अग्रणी होने की क्षमता है के व्यावसायीकरण में भाग लेने का अवसर मिलने पर संतोष व्यक्त किया।
डीएसटी के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, भौतिक-रसायन विज्ञान की गहरी समझ के आधार पर सुविधाजनक, गैर-संक्रामक चिकित्सा उपकरणों का विकास दुनिया भर में तेज गति से हो रहा है, और मूलभूत विज्ञान पर आधारित संस्थान जैसे एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, कोलकाता इस प्रकार की प्रौद्योगिकी और उपकरण विकास में सक्षम साझेदार हैं।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: देखें वीडियो: आपदाग्रस्त क्षेत्र का दौरा करने गए विधायक धामी बाल बाल बचे
Next: एनटीपीसी में हुआ 977.07 एमयू का उच्चतम दैनिक सकल उत्पादन

Related Post

rns featured image new
  • उत्तराखंड
  • देहरादून

उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी

RNS INDIA NEWS 10/06/2026 0
Rashifal
  • उत्तराखंड

राशिफल 08 जून

RNS INDIA NEWS 08/06/2026 0
rns featured image new
  • राष्ट्रीय

अखबार में खाना परोसने पर होगी कार्रवाई, खाद्य कारोबारियों को चेतावनी

RNS INDIA NEWS 07/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 11 जून
  • हरिद्वार नगर निगम घोटाले में कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की मांग
  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल करने को कांग्रेस का धरना
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध
  • मोहान-गनियाद्योली मोटर मार्ग के सुधारीकरण को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति
  • रिजॉर्ट की छत पर दिखा गुलदार, लोगों में दहशत
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.