
काठमांडू। नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ से तबाही का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 469 हो गई, जबकि 1,468 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई बस्तियां कीचड़ और मलबे के नीचे दब गई हैं, जबकि अनेक जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई गांवों का अस्तित्व तक मिट गया है। सड़क संपर्क बाधित होने के कारण दिल्ली-काठमांडू बस सेवा 28 और 29 अगस्त के लिए स्थगित कर दी गई है।
नेपाल पुलिस के अनुसार सबसे अधिक 137 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुन और नवलपरासी जिलों में भी राहत एवं खोज अभियान जारी है। लापता लोगों में जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान भी शामिल हैं।
प्रभावित त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट से 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर काठमांडू पहुंचाया गया है। इसके अलावा हेलीकॉप्टरों और सड़क मार्ग से अब तक 1,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया, जबकि चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने तिब्बत के प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों की समीक्षा की। नेपाल सरकार ने कई देशों से सहायता और सहयोग पर भी चर्चा की है।
भारत ने पड़ोसी देश की सहायता के लिए राहत सामग्री भेजने का अभियान तेज कर दिया है। 47.5 टन मानवीय सहायता सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, दवाइयां, स्वच्छता किट, सौर लैंप और खाद्य सामग्री शामिल हैं।
इस बीच चीन ने नेपाल को चेतावनी दी है कि सीमा क्षेत्र में बनी एक नई अवरोधक झील अगले तीन दिनों के भीतर टूट सकती है, जिससे निचले इलाकों में फिर भीषण बाढ़ आने का खतरा है। दोनों देशों की एजेंसियां संभावित खतरे पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

