
देहरादून। मां नंदा की बड़ी जात और नंदा देवी राजजात के आयोजन को लेकर एकराय बनाने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। बड़ी जात आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर ज्ञापन सौंपते हुए यात्रा पड़ावों के रख-रखाव और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल मंडल आयुक्त को दोनों समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने के निर्देश दिए।
बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत और महामंत्री अशोक गौड़ ने मुख्यमंत्री से कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप नंदा देवी बड़ी जात वर्ष 2026 में आयोजित किए जाने की इच्छा व्यक्त की गई है और इसकी तैयारियां उसी दिशा में की जा रही हैं। उन्होंने यात्रा मार्गों और पड़ावों पर व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने की आवश्यकता भी रखी।
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि शीघ्र ही नंदा बड़ी जात और नंदा राजजात समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों पक्षों की राय सुनकर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदा राजजात को भव्य और दिव्य बनाने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है और इसी उद्देश्य से समन्वय बैठक की तैयारी की जा रही है।
इस अवसर पर कुमाऊं राज परिवार के युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह, बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष तथा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विनोद नौटियाल, मां नंदा देवी राजजात समिति अल्मोड़ा के अध्यक्ष मनोज वर्मा, अमित साह, अर्जुन बिष्ट, राज परिवार के धीरेंद्र सिंह, राज परिवार के विक्रम सिंह साह और समिति सदस्य आशीष अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
नंदा बड़ी जात के आयोजन वर्ष को लेकर मतभेद, टिहरी व कुमाऊं राज परिवार की अलग राय
मां नंदा की बड़ी जात के आयोजन वर्ष को लेकर टिहरी और कुमाऊं राज परिवार के बीच अलग-अलग मत सामने आए हैं। बड़ी जात आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने हाल ही में टिहरी राज परिवार के भवानी सिंह शाह से भेंट कर वर्ष 2026 में ही बड़ी जात आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन भवानी सिंह शाह ने आयोजन वर्ष 2027 में करने की बात कही।
वहीं दूसरी ओर कुमाऊं राज परिवार और राजजात समिति अल्मोड़ा के पदाधिकारी बड़ी जात का आयोजन वर्ष 2026 में ही कराए जाने के पक्ष में हैं। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की राय अलग होने से फिलहाल अंतिम निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। आयोजकों का कहना है कि जनभावनाओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सामूहिक सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं, ताकि यात्रा के आयोजन को लेकर सभी पक्षों की एकराय बन सके।

