

देहरादून(आरएनएस)। मंगलवार को मसूरी प्रेस क्लब के तत्वावधान में आयोजित संवाद कार्यक्रम में एमडीडीए के सहायक अभियंता अजय मलिक ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आवासीय भवनों में व्यावसायिक कार्य के विरोध में आया आदेश केवल मसूरी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। मसूरी में भी आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे किया जा रहा है। कहा कि सर्वे के दौरान एक दिन में 71 निर्माण चिन्हित किए गए, जिनमें 51 ऐसे निर्माण पाए गए जिनके खिलाफ पहले ही कार्रवाई विचाराधीन है। 20 निर्माण के नक्शे मौके पर नहीं दिखा पाए, उन्हें नोटिस दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवासीय निर्माण में अगर कहीं भी व्यावसायिक गतिविधि पाई जाती है तो उसे करने नहीं दिया जाएगा। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह सर्वे लंबे समय तक चलेगा। उन्होंने कहा कि अगर वन संरक्षण अधिनियम 1980 से पहले की प्लिंथ व्यावसायिक है तो वह नक्शा पास कर निर्माण कर सकता है। वहीं केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों के लिए नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत 100 गज और पालिका सीमा से बाहर 120 से 150 गज में निर्माण की अनुमति 2016 में दी गई है, उससे पहले पूर्ण प्रतिबंध था। यह अनुमति परिवार बढ़ने के लिए दी गई है और वह भी केवल आवासीय होगी, उसके लिए भी मानचित्र स्वीकृत कराना होगा। होम स्टे के बारे में कहा कि प्राधिकरण एक्ट से चलता है, होम स्टे के लिए भी पॉलिसी बनी है। अगर मानक पूरे नहीं हैं तो उनके खिलाफ भी नोटिस की कार्रवाई की जा रही है। एमडीडीए एक पार्किंग लोक निर्माण विभाग गेस्ट हाउस अकादमी रोड जीरो प्वाइंट पर बना रहा है, उसको वन विभाग से स्वीकृति मिलने में तीन वर्ष लग गए। ईको पार्क का कार्य एक-दो साल में पूरा कर लिया जाएगा, उसका टेंडर हो चुका है। वन टाइम सेटलमेंट पर कहा कि 2016 में स्थानीय नागरिकों के लिए आवासीय भवन बनाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अगर कोई नोटिफाइड क्षेत्र में बनाना चाहता है तो नहीं बन सकता। पार्किंग निर्माण पर कहा कि एमडीडीए लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है और चार पार्किंग बना चुका है।



