कोरोनाकॉल में औषधीय पौधों की बढ़ी डिमांड

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ऋषिकेश। कोरोनाकॉल में औषधीय पौधों के प्रति लोगों का क्रेज बढ़ता दिख रहा है। क्षेत्रवासी इम्यूनिटी बढ़ाने को आयुर्वेद नुस्खे आजमा रहे हैं। वन प्रभाग नरेन्द्रनगर के भद्रकाली स्थित शिवालिक बॉयोलॉजी डायवर्सिटी पार्क में जड़ी बूटियों की मांग बढ़ी है। बीते माह करीब 31 हजार रुपये के औषधीय पौधों की लोगों ने खरीदारी की। कोरोनाकाल में औषधीय पौधे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में लोगों के लिए रामबाण साबित हो रहे हैं। कोरोना वायरस से बचने के लिए लोग अब आयुर्वेदिक औषधीय पौधों का सहारा भी ले रहे हैं। औषधीय पौधों की डिमांड बढऩे से नरेंद्रनगर वन प्रभाग के शिवालिक बॉयोडावर्सिटी की आय भी बढ़ी है। पहले दो से तीन हजार रुपये के पौधे ही प्रतिमाह बिकते थे। लेकिन अब महीने में 30 हजार से अधिक राजस्व वन विभाग को मिल रहा है। पार्क के प्रभारी बीपी बधानी ने बताया की कोरोनाकॉल में औषधीय पौधों की बिक्री बढ़ी है। जुलाई में वन विभाग को 31 हजार रुपये का राजस्व मिला है। अश्वगंधा, गिलोय, कालमेघ आंवला, तुलसी, श्यामा तुलसी, सतावर, लेमन ग्रास, एलोवेरा, नीम आदि के पौधे अधिक खरीदे जा रहे हैं।पार्क में ये 64 औषधीय तरह के पौधे हैं उपलब्ध रती, अपा मार्ग, बच, बेल, धुतकुमारी, कालमेघ, सूप सतावर, सतावर, नीम, ब्रह्मी, बिक्सा, पुर्ननवा, ढ़ाक, सफेद आंक, सनाय, अमलतास, सदाबहार, मंडूकपर्णी, हड़ जोड़, विष्णुकांता, पत्थर चूर, जावाग्रास, लेमनग्रास, पामारोजा, नागरमोथा, काला धतूरा, नेपाली धनिया, कलिहारी, मूलहटी, गुडमार, ललाम्बरी, अपा मार्ग, स्वीटमारजोरम, लेमन बाम, पिपरमेंट, मैंन्था, छुईमुई, कांच, लेमन तुलसी, काली तुलसी, आंवला, पिपली, चित्रक, सर्पगंधा, रोजमेरी, सिताब, देशी अकरकरा, स्टीविया, पाडल, सिली बम, सरपुंखा, बहेड़ा, हरड़, गिलोय, पुष्पपर्णी, खस, निरगुंडी, भंगराज, अश्वगंधा, इंद्र जौ, टिमरू, शमी वृक्ष।

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