


देहरादून(आरएनएस)। परेड ग्राउंड में शनिवार से चार दिनी ‘अंतरराज्यीय ठोऊडा महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ शानदार सांस्कृतिक स्वच्छता यात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस विराट सांस्कृतिक पर्व की शुरुआत महासू देवता एवं अन्य देवी-देवताओं के पूजन आह्वान के साथ हुई। महोत्सव का शुभारंभ सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन की संस्थापक गीता धामी और मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने की। अपने सम्बोधन में गीता धामी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक धरोहर के कारण अलग पहचान रखता है। अपनी लोक परंपराओं, वेशभूषा और संस्कृति को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत सराहनीय हैं। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि ठोऊडा महोत्सव जैसे मंच उत्तराखंड की विविध लोक संस्कृतियों और लोककलाओं को एक सूत्र में पिरोने का बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। सरकार भी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लगातार कार्य कर रही है। वहीं महोत्सव में पहले दिन जौनसारी, गढ़वाली, कुमाऊंनी, गोरखाली और हिमाचली संस्कृतियों का अनूठा समागम देखने को मिला। पहले दिन निकाली गई सांस्कृतिक स्वच्छता यात्रा एश्लेहॉल चौक, घंटाघर और दर्शनलाल चौक तक निकाली गई। इसमें 51 ढोल, 11 रणसिंघे और दमाऊ की थाप पर पारंपारिक परिधानों में सजे कलाकारों की झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। इस यात्रा में कूर्मांचल सांस्कृतिक परिषद, गोर्खाली सुधार सभा समेत अनेक सांस्कृतिक सामाजिक संस्थाओं के 200 कलाकारों, प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। झांकी जहां से भी निकली हर कोई लोक संगीत की थिरकन को महसूस करने लगा। संध्याकालीन ‘स्टार नाइट’ में लोक गायिका रेशमा शाह, विनोद रांगता, दीप्ती राना, सतीश थापा, गणेश कांडपाल, सुंदर आगरी और अनूप चांगता ने अपने सुरीले गीतों से समां बांध दिया। आयोजक कुंदन सिंह चौहान ने बताया कि महोत्सव में उत्तराखंड के हर कौने का लोक संगीत सुनने को मिलेगा। मौके पर नरेश शाह, शर्मिष्ठा कफलिया, हंस धामी, नेहा शर्मा, वंदना बिष्ट, मनोज सावंत, राजेंद्र बिष्ट, डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट, नरेश बादशाह, सुनीता बिजलवान, दान सिंह मेहता, उर्मिला चौहान, प्रशांत नेगी, विजय नेगी, सनी दयाल, बसंत शर्मा मौजूद रहे।
ठोऊडा नृत्य व ‘बिरूडी डांस’ का विशेष आकर्षण
पिछले चार वर्षों से आयोजित हो रहे इस महोत्सव में जौनसार, सिरमौर और हिमाचल क्षेत्र का प्रसिद्ध ‘ठोऊडा नृत्य’ इस बार भी मुख्य आकर्षण रहेगा। कौरव-पांडव युद्ध परंपरा से जुड़े इस नृत्य में तीर-कमान का प्रयोग होता है। इसमें 14 फीट लंबे बांस का हाथी बनाकर कराया जाने वाला ‘बिरूडी डांस’ बेहद खास होता है, जिसमें दर्शकों पर प्रसाद स्वरूप अखरोट फेंके जाने की अनूठी परंपरा है।



