

विकासनगर(आरएनएस)। विकासनगर के सहसपुर स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के अनुसंधान केंद्र में उत्तर प्रदेश के रेशम निदेशक आनंद कुमार शुक्ला ने रेशम उत्पादन की उन्नत तकनीकों, कीटपालन और शहतूत पौधरोपण के मॉडलों का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने वाले नवाचारों की सराहना की। केंद्र प्रभारी डॉ. पवन सैनी ने बताया कि इस कीटपालन गृह में लगभग 100 डीएफएल (रेशमकीट अंडों की निर्धारित इकाई) के पालन की क्षमता है। इसे वैज्ञानिक परिस्थितियों में रेशमकीट पालन को बढ़ावा देने के साथ कम लागत में उपयोगी व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसमें शरद ऋतु के दौरान रेशमकीट पालन का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।उन्होंने केंद्र में संचालित शहतूत पौधरोपण परियोजना की भी जानकारी दी। डॉ. सैनी ने कृषि आधारित शहतूत पौधरोपण मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें शहतूत के पौधों की कतारों के बीच खाली भूमि पर उपयुक्त फसलों की खेती की जा सकती है। इससे किसान शहतूत की पत्तियों के उत्पादन के साथ कृषि फसलों से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इस दौरान आनंद कुमार शुक्ला ने केंद्र परिसर में स्थापित रेशम संग्रहालय का भी अवलोकन किया। यहां रेशम उत्पादन से संबंधित तकनीकों और उपकरणों की जानकारी दी गई। उन्होंने केंद्र में विकसित तकनीकों और नवाचारों की सराहना की।




