Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • केंद्रीय बजट 2026-27: विकास की रफ्तार पर जोर, आम आदमी को मिली सीमित राहत
  • अर्थ जगत
  • राष्ट्रीय

केंद्रीय बजट 2026-27: विकास की रफ्तार पर जोर, आम आदमी को मिली सीमित राहत

RNS INDIA NEWS 01/02/2026
WhatsApp Image 2026-02-01 at 20.03.24_11zon

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए अर्थव्यवस्था को गति देने, निवेश बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत इस बजट में बुनियादी ढांचे, उद्योग, कृषि और कौशल विकास पर खास जोर दिया गया है, हालांकि महंगाई और आयकर राहत के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत नहीं मिल पाई है।

बजट में सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका फोकस रोजगार सृजन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भारत को विकसित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने पर है। इसके लिए पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी की गई है, जिससे सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, शहरी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बल मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा और अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी।

उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र के लिए बजट को अपेक्षाकृत सकारात्मक माना जा रहा है। लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए ऋण, गारंटी और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के प्रावधान किए गए हैं। उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में भी बजट में संकेत दिए गए हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन में बढ़ोतरी करते हुए सरकार ने उच्च-मूल्य फसलों, पशुपालन, मत्स्य पालन और तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सिंचाई, भंडारण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान दिया गया है। हालांकि किसान संगठनों का एक वर्ग इसे अपर्याप्त मान रहा है और न्यूनतम समर्थन मूल्य व आय सुरक्षा पर ठोस कदमों की कमी की बात कर रहा है।

शिक्षा और कौशल विकास को लेकर बजट में युवाओं पर फोकस दिखता है। उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और महिला छात्रों की सुविधा से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार का तर्क है कि इससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार होगा।

राजकोषीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घाटे को नियंत्रित रखने का लक्ष्य दोहराया है। राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने की रणनीति के साथ खर्च और निवेश के बीच संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ
बजट के बाद आम लोगों की नजर इस पर रही कि रोजमर्रा की चीजों पर क्या असर पड़ेगा। सरकार ने कुछ वस्तुओं पर सीमा शुल्क और करों में बदलाव किए हैं।
कुछ आवश्यक कच्चे माल, उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले इनपुट और चुनिंदा आयातित घटकों पर शुल्क घटाने से इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और कुछ औद्योगिक उत्पादों के सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कुछ जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ लग्जरी और गैर-जरूरी वस्तुओं पर शुल्क बढ़ने से उनके महंगे होने की आशंका है। आयातित उपभोक्ता सामान, चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और कुछ तैयार खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर सीमित वर्ग पर पड़ेगा, जबकि आम जरूरत की वस्तुएं largely कर दायरे से बाहर रखी गई हैं।
ईंधन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं पर कोई बड़ा कर बदलाव न होने से आम उपभोक्ता को तत्काल राहत या झटका, दोनों ही सीमित हैं। आयकर स्लैब में बड़े बदलाव न होने के कारण मध्यम वर्ग को भी सीधे लाभ की उम्मीद पूरी नहीं हुई।

कुल मिलाकर मूल्यांकन
केंद्रीय बजट 2026-27 को विकास-उन्मुख और दीर्घकालिक सोच वाला बजट माना जा रहा है। इसमें बुनियादी ढांचे, उद्योग और भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी पर जोर साफ दिखता है। हालांकि महंगाई, बेरोजगारी और कर राहत जैसे मुद्दों पर आम आदमी को अपेक्षित राहत न मिलने के कारण आलोचना भी हो रही है। यह बजट अल्पकालिक राहत से अधिक दीर्घकालिक विकास के रास्ते को प्राथमिकता देता नजर आता है, जिसका वास्तविक असर आने वाले वर्षों में जमीन पर दिखेगा।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: जीपीएस मैपिंग से दिल की गंभीर बीमारी का इलाज
Next: 20 फ़रवरी तक बढ़ाई गई ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान की अवधि

Related Post

rns featured image new
  • राष्ट्रीय

दिल्ली हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध बरकरार रखा

RNS INDIA NEWS 19/06/2026 0
rns featured image new
  • राष्ट्रीय

भांजी से बात करने की खौफनाक सजा, मामाओं ने बीच सड़क पर युवक पर चढ़ा दी कार

RNS INDIA NEWS 13/06/2026 0
WhatsApp Image 2026-06-13 at 18.54.51
  • उत्तराखंड
  • देहरादून
  • राष्ट्रीय

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आईएमए की पासिंग आउट परेड संपन्न, 515 कैडेट बने सैन्य अधिकारी

RNS INDIA NEWS 13/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 20 जून
  • राज्यपाल ने डीएम और एसएसपी को किया सम्मानित
  • अमानतगढ़ फैक्ट्री फायरिंग कांड से जुड़ा बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल
  • लंबित मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों का धरना जारी, उग्र आंदोलन की चेतावनी
  • तनाव प्रबंधन पर बीयरशिबा स्कूल में विद्यार्थियों को दिए व्यावहारिक टिप्स
  • प्रधान प्रबंधक के तबादले के विरोध में दुग्ध संघ में उबाल, 21 कर्मचारियों ने दिया सामूहिक त्यागपत्र
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.