
देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की बाजपुर शाखा में हुए 3.48 करोड़ रुपये के लोन घपले में सीबीआई की विशेष अदालत ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 12 दोषियों को सजा सुनाई है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि लोन में यह घपला किया गया। मामले की पैरवी सीबीआई के लोक अभियोजक अमरेंद्र सिंह ने की। यह बैंक घोटाला वर्ष 2014-15 में ऊधमसिंहनगर स्थित बाजपुर शाखा में हुआ था। आरोप था कि तत्कालीन बैंक मैनेजर आरएएस दिनकर ने बाजपुर के एक निजी ट्रैक्टर डीलर (केजीएन ट्रैक्टर्स एंड इक्विपमेंट्स) के साथ मिलकर साजिश रची थी। इन्होंने मिलकर केसीसी और कृषि लोन का फर्जीवाड़ा कर पैसा मंजूर किया गया। कृषि उपकरणों की कोई वास्तविक खरीद नहीं हुई। बैंक से खरीद और लोन दिखाकर लगभग 3.48 करोड़ रुपये कई लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। मामला पकड़े जाने पर बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक सत्यपाल सिंह ने 19 जून 2018 को देहरादून सीबीआई शाखा में यह केस दर्ज कराया। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 24 दिसंबर 2018 को तत्कालीन शाखा प्रबंधक रामअवतार सिंह दिनकर समेत 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई की अदालत ने मंगलवार को फैसला देते हुए तत्कालीन बैंक मैनेजर राम अवतार सिंह दिनकर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार साल के कठोर कारावास और अलग-अलग धाराओं में कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामले के 11 अन्य दोषियों राम सिंह, हरजीत सिंह, दीवान सिंह, हरदत्त सिंह, जसवीर सिंह, बलकार सिंह, पूरन चंद, दीदार सिंह, महेश कुमार, गुरदीप सिंह और सोना सिंह को आईपीसी की धारा 120-बी और 420 के तहत दोषी पाया गया है। अदालत ने इन सभी को एक-एक साल के कठोर कारावास और कुल 30-30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इनके खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी।ओटीएस से पैसा लौटाने पर इमामुद्दीन को मिली राहतइस घोटाले के एक अन्य आरोपी इमामुद्दीन ने मुकदमे के दौरान बैंक को ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) के तहत धोखाधड़ी की रकम लौटा दी और अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इमामुद्दीन पर आरोप था कि 22 जनवरी 2015 को उसे 12.27 लाख रुपये का लोन मंजूर हुआ था, लेकिन उसने कोई मशीनरी खरीदने के बजाय डीलर से 6.16 लाख रुपये वापस लेकर अपने पुराने कर्ज चुका दिए। जुर्म स्वीकारने के बाद अदालत ने इमामुद्दीन की फाइल अलग कर दी थी। मंगलवार को अदालत ने उसे कोर्ट चलने तक सजा और कुल 30 हजार रुपये के जुर्माने सजा दी। मोहम्मद फुरकान और इरशाद हुसैन आदि ने भी अपना जुर्म पहले ही स्वीकार कर लिया था, जिन्हें पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। ट्रायल के दौरान दत्तर सिंह और कश्मीर सिंह की मौत हो जाने के कारण उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया था।

