
हरिद्वार(आरएनएस)। कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले कांगड़ी 4.2 से छैल-पीपली (रसियाबढ़) तक करीब सात किलोमीटर लंबे पारंपरिक नहर पटरी मार्ग की हालत इस बार भी नहीं सुधर सकी। गाजीवाली से छैल-पीपली चौराहे तक करीब चार किलोमीटर सड़क लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रही है। जगह-जगह उखड़े डामर, बाहर निकली बजरी और सड़क किनारे बने गड्ढे कांवड़ियों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। वहीं, गुरुवार से शुरू हो रहे कांवड़ मेले से पहले गौरी शंकर पार्किंग तक पहुंचने वाला सर्विस मार्ग भी बुधवार तक अधूरा मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे से पैदल कांवड़ियों को इसी मार्ग पर डायवर्ट किया जाता है।उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद, बिजनौर, धामपुर, नगीना और स्योहारा समेत कई क्षेत्रों से आने वाले हजारों श्रद्धालु इसी रास्ते से हरिद्वार पहुंचते और वापस लौटते हैं। मार्ग पर वर्षों से डामरीकरण और मरम्मत नहीं होने के कारण सड़क की ऊपरी परत कई स्थानों पर उखड़ चुकी है। नीचे की बजरीनुमा कंक्रीट बाहर आ जाने से पैदल चलने में दिक्कत हो रही है। कई श्रद्धालु पक्की सड़क छोड़कर किनारे बने कच्चे रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। बरसात के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। सड़क के दोनों ओर कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो पैदल यात्रियों के लिए हादसे का कारण बन सकते हैं। हरिद्वार से जल लेकर लौटने वाले श्रद्धालु कांगड़ी 4.2 चौराहे पर कुछ देर विश्राम भी करते हैं, लेकिन यहां झाड़ियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने से व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत शाम करीब पांच बजे के बाद इस मार्ग पर कांवड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी जाती है। दिन के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।उधर, सिद्ध स्रोत पुल से आगे कांगड़ी 4.2 फ्लाईओवर के बराबर से गौरी शंकर पार्किंग तक तैयार किया जा रहा सर्विस मार्ग भी बुधवार दोपहर तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया था। मार्ग पर कई जगह मिट्टी के ढेर और बारिश का पानी भरे गड्ढे दिखाई दिए। इसी मार्ग से उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले हल्के और भारी वाहनों का डायवर्जन किया जाना है, लेकिन अधूरा निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
