


अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने पांच फसलों की आठ नई उन्नत किस्में विकसित की हैं। राज्य किस्म विमोचन समिति की 10 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इन किस्मों को उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक एवं वर्षा आधारित परिस्थितियों में समय पर बुवाई के लिए विमोचित किया गया। इनमें मक्का की वीएल हिमाद्री, जौ की वीएलबी 177, मसूर की वीएल मसूर 538 एवं वीएल मसूर 535, सोयाबीन की वीएल सोया 106 एवं वीएल सोया 107 तथा धान की वीएल धान 71 और वीएल धान 160 शामिल हैं। मक्का की वीएल हिमाद्री 90 से 95 दिनों में तैयार होने वाली अगेती संकर किस्म है। राज्य स्तरीय परीक्षणों में इसकी औसत उपज 4,864 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही, जो चेक किस्म वीएमएच 45 से 15.21 प्रतिशत अधिक है। जौ की वीएलबी 177 द्वि-उद्देशीय किस्म है, जिसकी औसत दाना उपज 1,730 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। यह पीला एवं भूरा रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी पाई गई है। मसूर की वीएल मसूर 538 और वीएल मसूर 535 बड़ी दाना वाली किस्में हैं। इनकी औसत उपज क्रमशः 1,150 और 1,202 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। दोनों 155 से 160 दिनों में तैयार होती हैं। इनमें क्रमशः 23.47 और 24.91 प्रतिशत प्रोटीन पाया गया है। वीएल मसूर 535 उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधी पाई गई है। सोयाबीन की वीएल सोया 106 की औसत उपज 1,649 किलोग्राम तथा वीएल सोया 107 की 1,700 से 1,800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। दोनों किस्में 115 से 120 दिनों में परिपक्व होती हैं और परीक्षणों में एफएलएस रोग के प्रति प्रतिरोधकता प्रदर्शित की है। धान की वीएल धान 71 की जैविक परिस्थितियों में औसत उपज 3,609 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। इसने पंत धान 26 से 21.50 प्रतिशत अधिक उपज दी। वहीं वीएल धान 160 की औसत उपज 2,321 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही, जो विवेक धान 154 से 18.37 प्रतिशत अधिक है। दोनों किस्मों में प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधकता और बेहतर गुणवत्ता के गुण पाए गए हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इन किस्मों से पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को बेहतर उपज, रोग प्रतिरोधकता और गुणवत्ता वाली फसलों के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।

