Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • जमीन के मुआवजे से नहीं काट सकते विकास शुल्क : सुप्रीम कोर्ट
  • राष्ट्रीय

जमीन के मुआवजे से नहीं काट सकते विकास शुल्क : सुप्रीम कोर्ट

RNS INDIA NEWS 04/03/2021
SupremeCourtofIndia

नई दिल्ली (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसानों को भू अधिग्रहण कानून के तहत दिए मुआवजे से केवल वैधानिक कटौती ही की जा सकती है। राज्य सरकार या उसके विभाग किसी अन्य मद में कोई कटौती नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ सरकारी कंपनी टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसीएल) की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2018 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सरकार यह नहीं कह सकती कि उसकी अपनी नीति है और इस प्रकार मुआवजा कम किया जाएगा। खासतौर पर जब मुआवजे की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट कर चुका हो। इससे पहले टीएचडीसीएल की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ से कहा था कि कंपनी ने भू अधिग्रहण के लिए मुआवजा दिया था और विकसित जमीन पाने वालों से विकास शुल्क लेना चाहती है। इसके दायरे में 4500 परिवार आते हैं। इस पर चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की मौजूदगी वाली पीठ ने पूछा कि आपने किस नियम के तहत मुआवजे में से कटौती की है? आप इस बात को लेकर बहस नहीं कर सकते कि इसे लेकर कोई नीति है। यह असांविधानिक है। कोई राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के बदले में दिए मुआवजे से कटौती कैसे कर सकती है? पीठ ने याचिका खारिज करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कहा, महज इसलिए कि आप अपने तर्कों में बेहद मजबूत हैं, हम सरकार (सरकारी कंपनी) को एक और मौका नहीं दे सकते। स्पेशल लीव पिटीशन खारिज की जाती है। साथ ही यदि इस मामले से जुड़ी कोई याचिका लंबित है तो वह भी रद्द की जाती है।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: पति के लिए पत्नी निजी संपत्ति नहीं : सुप्रीम कोर्ट
Next: तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स और निफ्टी हुआ धड़ाम

Related Post

rns featured image new
  • राष्ट्रीय

दिल्ली हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध बरकरार रखा

RNS INDIA NEWS 19/06/2026 0
rns featured image new
  • राष्ट्रीय

भांजी से बात करने की खौफनाक सजा, मामाओं ने बीच सड़क पर युवक पर चढ़ा दी कार

RNS INDIA NEWS 13/06/2026 0
WhatsApp Image 2026-06-13 at 18.54.51
  • उत्तराखंड
  • देहरादून
  • राष्ट्रीय

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आईएमए की पासिंग आउट परेड संपन्न, 515 कैडेट बने सैन्य अधिकारी

RNS INDIA NEWS 13/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 25 जून
  • स्याना चट्टी में निर्माणाधीन बैली ब्रिज की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
  • बढ़े बिजली बिलों पर भड़के चौड़ा के ग्रामीण
  • वित्तीय अनुशासन के लिए डीडीओ व वित्त अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित
  • समूह ‘ग’ परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग शुरू
  • अल्मोड़ा में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा, प्रभारी सचिव ने रिस्पांस टाइम घटाने पर दिया जोर
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.