
अल्मोड़ा। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड, जनपद अल्मोड़ा ने आयकर स्लैब में कोई बदलाव न किए जाने पर निराशा व्यक्त की है। संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ मनोज कुमार जोशी और सचिव धीरेंद्र कुमार पाठक ने कहा कि भविष्य में एक जनवरी 2026 से आठवां वेतनमान लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में शिक्षक और कार्मिक आयकर के दायरे में आ जाएंगे, जबकि सरकार ने इस संभावित स्थिति को ध्यान में नहीं रखा है। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि महंगाई में लगातार वृद्धि हो रही है और ऐसे में आयकर स्लैब में राहत न देना शिक्षक-कर्मचारियों के हितों के प्रतिकूल है। उन्होंने मांग की कि सरकार कम ब्याज दर पर अधिकतम 30 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराए, ताकि शिक्षक और कर्मचारी जमीन, आवास और बच्चों की उच्च शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। साथ ही आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए आयकर स्लैब में संशोधन किया जाना चाहिए, जिससे आम शिक्षक और कर्मचारियों को राहत मिल सके। संगठन ने यह भी कहा कि बारह महीने के वेतन में से दस या ग्यारह महीने का वेतन आयकर के रूप में लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। इससे शिक्षकों और कार्मिकों की आवश्यक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं और उन्हें दोबारा ऋणग्रस्त होना पड़ रहा है। पदाधिकारियों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गोल्डन कार्ड योजना प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भुगतान छह महीने तक लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में संगठन के संरक्षक मंडल सदस्य पी. एस. बोरा, गोकुल मेहता, रमेश पांडेय और महेंद्र गुसाईं, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिगंबर फुलोरिया, उपाध्यक्ष महेश आर्य, कार्यालय सचिव गणेश भंडारी, संगठन मंत्री डी. के. जोशी, संयुक्त मंत्री तारा सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह लटवाल, भगवत सिंह सतवाल, ऑडिटर दीपशिखा मेलकन्या और कोषाध्यक्ष संजय जोशी ने भी सरकार से शिक्षक-कर्मचारियों को आयकर स्लैब और चिकित्सा प्रतिपूर्ति में राहत देने की मांग की है।



