
विकासनगर(आरएनएस)। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकासनगर जतिन मित्तल की अदालत ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत वर्ष 2020 से लंबित एक वाद में निर्णय सुनाते हुए पीड़िता की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली। अदालत ने पति और उसकी मां को भविष्य में किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा न करने का निर्देश देते हुए पीड़िता को आवास, मुआवजा और स्त्रीधन लौटाने के आदेश दिए हैं। वादिनी ने न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उससे अतिरिक्त दहेज के रूप में 10 लाख रुपये की मांग की गई। विरोध करने पर उसके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की गई तथा 28 अगस्त 2019 को उसे वैवाहिक घर से निकाल दिया गया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के साक्ष्यों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि पति रवि शेखर घिल्डियाल और उसकी मां के विरुद्ध घरेलू हिंसा के आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से सिद्ध होते हैं। वहीं, ननद और ननदोई के विरुद्ध लगाए गए आरोप साक्ष्यों के अभाव में प्रमाणित नहीं हो सके। अदालत ने पति को पीड़िता के लिए साझा गृहस्थी में रहने योग्य आवास उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यदि आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो पति को पत्नी को पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराया देना होगा। इसके अतिरिक्त मानसिक पीड़ा एवं वाद व्यय के लिए एक लाख रुपये एकमुश्त एक माह के भीतर अदा करने के आदेश दिए गए हैं। न्यायालय ने पत्नी का समस्त स्त्रीधन वापस करने का भी निर्देश दिया है। यदि स्त्रीधन वापस नहीं किया जाता है तो उसके बदले एक लाख रुपये एकमुश्त भुगतान करना होगा। साथ ही अदालत ने पति और उसकी मां को भविष्य में स्वयं अथवा किसी अन्य के माध्यम से पीड़िता के साथ किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा न करने का भी निर्देश दिया है।
