
ऋषिकेश(आरएनएस)। संत समिति ने नगर निगम ऋषिकेश द्वारा भंडारे और धार्मिक आयोजनों पर लगाए जा रहे शुल्क और मंदिर परिसर में हो रहे अतिक्रमण को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से धार्मिक सेवा कार्यों से शुल्क वापस लेने और सरकार से धार्मिक स्थल का स्वरूप बनाए रखने की मांग की। रविवार को गंगानगर स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर में संत समिति की बैठक हुई। समिति अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने मंदिर परिसर में हो रहे अतिक्रमण को लेकर कड़ा विरोध जताया। कहा कि इस संबंध में पूर्व में एसडीएम एवं नगर आयुक्त को लिखित ज्ञापन दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कहा कि ऋषिकेश से अनेकों आश्रम-धर्मशालाओं को भू-माफिया द्वारा बेचने के साथ ही उनके धार्मिक स्वरूप को बदला जा रहा है। संत समाज ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर समाधान की मांग की जाएगी। कहा कि ऋषिकेश क्षेत्र में संत समिति किसी भी धार्मिक स्थल का स्वरूप नहीं बदलने देगी। यहां जो भी निर्माण होंगे वह सिर्फ धार्मिक संस्थाओं द्वारा बनाए किए जाएंगे। व्यावसायिक भवनों को भी रोका जाएगा और उनके खिलाफ शिकायत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी। समिति महासचिव महंत रामेश्वर गिरी महाराज ने नगर निगम ऋषिकेश द्वारा भंडारे और धार्मिक आयोजनों पर लगाए जा रहे शुल्क पर घोर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक सेवा कार्यों पर शुल्क लगाया जाना अनुचित है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। बैठक में महंत पूर्णानंद, महंत निर्मल दास तपोवन, स्वामी धर्मवीर दादूपंथी, महंत हरिदास, महामंडलेश्वर रविंद्र दास लक्ष्मण झूला, महंत केवल्यानंद सरस्वती, महंत विवेकानंद सरस्वती, महंत कृष्णानंद, महंत सुंदरानंद सरस्वती, स्वामी ध्यान दास, महंत श्रद्धागिरी माता, महंत धर्मदास, महंत कृष्णकांत, महंत संध्यागिरी, महंत महेश मुनि, महंत धर्मानंद गिरी, महंत सरवेंद्र सिंह, स्वामी आनंद महाराज, महंत राजराजेश्वर गिरी आदि उपस्थित रहे।


