
कहा, बॉण्डधारी चिकित्सकों के पीजी कोर्स को बनेगी अध्ययन नीति
चिकित्साधिकारियों की डीपीसी 10 फरवरी तक कराने के निर्देश
देहरादून (आरएनएस)। चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों का पृथक कैडर बनाया जाएगा। इसके लिए शीघ्र कैबिनेट में प्रस्ताव लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेजों से बॉण्डधारी एमबीबीएस चिकित्सकों के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने के लिए पृथक अध्ययन नीति तैयार की जाएगी। विभिन्न श्रेणियों के चिकित्साधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) आगामी 10 फरवरी तक पूर्ण कर समय पर पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा।
यह निर्देश राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा और इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों के आवश्यक पदों को शामिल करते हुए पृथक कैडर का गठन किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि राज्य के बॉण्डधारी चिकित्सकों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने के लिए अलग से अध्ययन नीति बनाई जाएगी, ताकि उनके अध्ययन काल में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। पीजी पाठ्यक्रम के लिए जाने वाले चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए 250 चिकित्सकों का एक आरक्षित पूल तैयार करने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट के पदों के पुनर्गठन, स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक कैडर, प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन के गठन तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के पृथक कैडर से जुड़े प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में उच्चीकृत और नवसृजित उप जिला चिकित्सालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नए पदों के सृजन का प्रस्ताव भी शीघ्र कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि संबंधित क्षेत्रों की जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को वर्तमान वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट के आय-व्यय की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बजट का समयबद्ध और नियमानुसार व्यय सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने विभिन्न श्रेणी के चिकित्साधिकारियों की वरिष्ठता सूची के आधार पर आगामी 10 फरवरी तक डीपीसी पूर्ण कराने के निर्देश दिए, ताकि पदोन्नति में अनावश्यक देरी न हो।
मंत्री ने सभी चिकित्सा इकाइयों और मेडिकल कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने, गैरहाजिर चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने, स्वास्थ्य इकाइयों में साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर रखने और मरीजों को समय पर गुणवत्ता पूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में आयुष्मान योजना के अंतर्गत बिलों के भुगतान और गोल्डन कार्डधारकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को भी कहा गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉक्टर अजय कुमार आर्य, निदेशक एनएचएम डॉक्टर रश्मि पंत, प्राचार्य हरिद्वार मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर सी. एम. एस. रावत, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉक्टर आर. एस. बिष्ट, संयुक्त निदेशक डॉक्टर अजीत मोहन जौहरी, डॉक्टर एन. एस. नपच्याल, डॉक्टर तुहिन कुमार, डॉक्टर अमलेश, वित्त नियंत्रक दीपाली भरणे, अभिषेक आनंद, रजिस्ट्रार नर्सिंग काउंसिल मनीषा ध्यानी, रजिस्ट्रार मेडिकल काउंसिल सुधीर कुमार पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


