Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • अंतरराष्ट्रीय
  • कनाडा में खून बहा रहे पंजाबी गैंग, 11 लोगों की बना ली हिट लिस्ट, सकते में ट्रूडो सरकार
  • अंतरराष्ट्रीय

कनाडा में खून बहा रहे पंजाबी गैंग, 11 लोगों की बना ली हिट लिस्ट, सकते में ट्रूडो सरकार

RNS INDIA NEWS 05/08/2022
default featured image

कनाडा। कनाडा में पंजाबी गैंग सडक़ों पर खून बहा रहा है। खालिस्तानियों, आईएसआई जासूसों और गैंगस्टरों पर नरमी बरतना कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार के लिए अब बड़ी परेशानी बनकर सामने आया है। पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर कनाडा में मौज फरमा रहे हैं। साल 2017 में छात्र वीजा पर कनाडा पहुंचे गोल्डी बराड़ को कानूनी सुरक्षा देने के लिए खालिस्तानी संगठन एसएफजे सामने आया है। गोल्डी बराड़ का संबंध मई में सिद्धू मूसेवाला की हत्या में सामने आया था। अब हाल ही में 75 वर्षीय सिख नेता रिपुदनमन सिंह मलिक की निर्मम हत्या हुई। पंजाब के कबड्डी खिलाड़ी संदीप सिंह के हत्यारे कनाडा में पनाह लिए हैं। इन गैंग पर कनाडा पुलिस नकेल कसने तो नाकाम रही लेकिन अब 11 लोगों की हिट लिस्ट जारी की है। गौर करने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में 11 में से नौ पंजाबी मूल के हैं।
मई में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या की गई। इस हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई तो पंजाब पुलिस की पकड़ में है लेकिन, बिश्नोई का सहयोगी गोल्डी बराड़ कनाडा में उत्पात मचा रहा है। साल 2017 में छात्र वीजा पर कनाडा पहुंचा बराड़ अब स्थानीय पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कनाडा में हाल ही में 75 वर्षीय सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या की गई थी। मलिक 1985 के दुखद एयर इंडिया कनिष्क आतंकवादी बम विस्फोट मामले में बरी किया गया था। इस हत्याकांड ने साबित कर दिया है कि कनाडा में पंजाबी गिरोहों एक बार फिर ऐक्टिव हो गया है।

हत्यारों को कानूनी सुरक्षा
यह रिकॉर्ड पर है कि प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के संस्थापक गुरपतवंत पन्नून ने खुले तौर पर मूसेवाला के हत्यारों को कानूनी सुरक्षा का आश्वासन दिया और अभी भी बरार या पन्नून के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। मलिक की हत्या के मामले में 21 साल के टान्नर फॉक्स और 23 साल के जोस लोपेज पर फर्स्ट-डिग्री हत्या का आरोप लगाया गया है। मलिक की 15 जून को ब्रिटिश कोलंबिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कनाडा के गैंगस्टरों में पंजाब के युवा शामिल
एक रिपोर्ट बताती है कि कनाडा में हिंसा और हत्या करने वाले गैंगस्टरों में पंजाब के युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं। कनाडा पुलिस की ओर से जारी हिट लिस्ट में कुल 11 नाम हैं, जिसमें अकेले 9 पंजाब के रहने वाले हैं। वैंकूवर पुलिस और बीसी रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के साथ ब्रिटिश कोलंबिया (सीएफएसईयू-बीसी) की संयुक्त सेना विशेष प्रवर्तन इकाई ने सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। पुलिस का मानना है कि पंजाबी-कनाडाई आपराधिक गिरोह कनाडा में स्थित एक समुदाय में बनते हैं और मुख्य रूप से पंजाबी जातीय मूल के युवा व्यक्तियों से बने होते हैं।

कनाडा में छिपे पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सात कुख्यात गैंगस्टर, जिनमें से पांच ए श्रेणी के साथ हिट लिस्ट में शामिल हैं। वे सभी पंजाब पुलिस द्वारा हत्या, लूट, जबरन वसूली और अपहरण के मामलों में वांछित हैं, लेकिन वर्षों से कनाडा में आसानी से छिपे हुए हैं।

कनाडा से भारत में वसूली का खेल
फैक्ट यह है कि ये गैंगस्टर कट्टरपंथी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जो पंजाब में आतंकी ऑपरेशन और हत्याओं को अंजाम देने के अलावा जबरन वसूली के लिए कॉल कर रहे हैं। यह सबकुछ भारत में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चीजों को और अधिक जटिल और कठिन बना रहा है क्योंकि क्योंकि उन्हें भारत में प्रत्यर्पित करने से पहले कानूनी कार्रवाई का सामना करना सबसे कठिन काम है।

पश्चिमी देशों से समर्थन
कनाडा के अधिकारियों को ठोस सबूत देने के बावजूद भारत के लिए इन गैंगस्टरों को वापस लाना पहाड़ चढऩे से कम नहीं है। कनाडा, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देश पर्याप्त सबूत की कमी के बहाने के साथ भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले अपराधियों को आसानी से नहीं भेजते। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंजाब मूल के दो व्यक्तियों, एक महिला और उसके भाई को कनाडा से एक लडक़ी की ऑनर किलिंग के लिए प्रत्यर्पित करने में भारत को लगभग दो दशक लग गए।

खालिस्तानियों से चुनावी फंड?
कनाडा सरकार उड्डयन इतिहास में सबसे बड़ी घटना के तहत साल 1985 में एयर इंडिया की कनिष्क बमबारी हुई थी। इस हमले में 329 लोग हवा में ही मारे गए थे। इस मामले की उचित जांच और परीक्षण करने में कनाडा सरकार विफल रही। खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कनाडा की अनिच्छा को वोट बैंक की राजनीति के रूप में देखा जा सकता है। इसके पीछे का कारण सिखों द्वारा भारी चुनावी फंडिंग दिया जाना है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि सिख फॉर जस्टिस, गुरपतवंत पन्नून और हरदीप सिंह निज्जर कनाडा से बिना डर के कथित तौर पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

रिपुदमन मलिक हत्याकांड में फेलियर
हाल ही में, पुलिस ने रिपुदमन मलिक की दिनदहाड़े हत्या में गैंगस्टर से आतंकवादी बने अर्श दल्ला के शामिल होने का दावा किया था। हालांकि अधिकारियों ने हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उन्होंने हत्या के मास्टरमाइंड के लिंक, मकसद और विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। कनाडा के अधिकारी भी अब तक इस तथ्य का संज्ञान लेने में विफल रहे हैं कि मलिक को पन्नून के एक गुर्गे हरदीप निज्जर और एक अन्य कट्टरपंथी खालिस्तानी मोनिंदर बॉयल द्वारा धमकी दी जा रही थी। मलिक की हत्या के बाद ब्रिटिश कोलंबिया क्षेत्र में पंजाबियों के बीच गैंगवार की कई घटनाएं हुई, जो कि कनाडा पुलिस और सरकार के फेलियर को दिखाता है।

संदीप सिंह के हत्यारों को पनाह
अधिकारियों ने मलिक की हत्या में अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की। जिसमें गुरविंदर सिंह धालीवाल, निज्जर के करीबी सहयोगी, गुरप्रीत सिंह सहोता, चैनल पंजाबी में एक टीवी होस्ट समेत कई शामिल हैं। कबड्डी खिलाड़ी संदीप सिंह के हत्यारे अब भी ब्रैम्पटन में बेखौफ रह रहे हैं।

कनाडा में आईएसआई
यह भी एक खुला रहस्य है कि पाकिस्तान की आईएसआई की मौजूदगी पूरे कनाडा में बड़ी संख्या में है। जासूसी एजेंसी भारत विरोधी और खालिस्तानी तत्वों को हर तरह की सहायता और सलाह देकर उनके साथ घनिष्ठ समन्वय में काम करने के लिए जानी जाती है। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि कनाडा के अधिकारियों ने कनाडा से आईएसआई की विघटनकारी और आपत्तिजनक गतिविधियों पर कभी सवाल नहीं उठाया।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क मलबा और बोल्डर गिरने से बंद
Next: रूस पर प्रतिबंध लगाने का दांव पड़ा उल्टा, यूरोप में बिजली के लिए मचा हाहाकार

Related Post

default featured image
  • अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने की नृशंसता की हद पार, हिंदू युवक की हत्या कर शव को जलाया

RNS INDIA NEWS 19/12/2025 0
default featured image
  • अंतरराष्ट्रीय

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर दुनिया का पहला बैन लागू किया

RNS INDIA NEWS 10/12/2025 0
default featured image
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय

भारत के पड़ोसी देश में फिर भड़का जेन-जेड आंदोलन, कई इलाकों में लगा कर्फ्यू; एयरपोर्ट बंद

RNS INDIA NEWS 20/11/2025 0

[display_rns_ad]

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 15 जनवरी
  • राज्य गठन के बाद बने फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच करे सरकार
  • भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोश
  • लाखों के जेवरात उड़ाने वाला आरोपी पांच घंटे में गिरफ्तार
  • राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन की मांग
  • मकर संक्रांति पर सिमकनी नौले के आसपास चला स्वच्छता अभियान

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.