Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • कैबिनेट के इस निर्णय पर अभी तक जारी नहीं हुआ शासनादेश
  • उत्तराखंड

कैबिनेट के इस निर्णय पर अभी तक जारी नहीं हुआ शासनादेश

RNS INDIA NEWS 17/11/2020
rns featured image new

देहरादून।

परिवहन विभाग द्वारा विभिन्न वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए वसूल किए जा रहे ग्रीन सेस के संबंध में कैबिनेट के फैसले पर अभी तक शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि इसमें अभी एक और संशोधन कर कैबिनेट के सम्मुख रखा जाएगा। इसके बाद ही इसमें कोई निर्णय होगा। दरअसल, कैबिनेट के फैसले से परिवहन विभाग को तकरीबन 90 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है। प्रदेश में वाहनों से हो रहे प्रदूषण को कम करने के उपायों और सडक़ सुरक्षा के कार्यों के लिए 12 दिसंबर 2012 को सभी नए वाहनों के पंजीकरण पर ग्रीन सेस लागू किया था। इसमें पेट्रोल से चलने वाले चौपहिया वाहनों से 1500 रुपये, डीजल से चलने वाले चौपहिया वाहनों से 3000 रुपये और दुपहिया वाहनों से छह सौ रुपये शुल्क का प्रविधान किया गया। वहीं व्यावसायिक वाहनों पर फिटनेस के दौरान भी यही शुल्क लिया जाता है।

निजी वाहनों में 15 वर्ष बाद रिन्यूअल के समय भी ग्रीन सेस लिया जाता है। प्रतिवर्ष इस मद में तकरीबन 12.5 करोड़ रुपये एकत्र होता है। शुरुआत में ग्रीन सेस से मिलने वाले शुल्क को जमा करने लिए विभाग ने शहरी परिवहन निधि स्थापित की। इसके लिए नियमावली भी बनाई गई, लेकिन खामियों के चलते इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। नतीजतन निधि का खाता नहीं खुल पाया। इस कारण तकरीबन सात वर्षों तक ग्रीन सेस का कोई इस्तेमाल हो ही नहीं सका। इसी वर्ष जुलाई में हुई कैबिनेट में ग्रीन सेस के संबंध में प्रस्ताव लाया गया। इसमें कहा गया कि सारा पैसा पहले की तरह ही कोषागार में जाएगा। उसके बाद सरकार यह तय करेगी कि निधि में कितना पैसा दिया जाए। यानी यह पैसा बजट के रूप में विभाग को मिलना था।

कैबिनेट के इस निर्णय के चार माह बाद भी इस संबंध में शासनादेश नहीं हो पाया है। दरअसल, यह पैसा सडक़ सुरक्षा के नाम पर लिया जा रहा है। इसे विभागीय बजट में शामिल किए जाने से विधिक समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई गई। ऐसे में अब इसमें नए सिरे से संशोधन पर विचार किया जा रहा है।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: विधायक महेश नेगी मामले की जाँच पौड़ी जिले को ट्रांसफर
Next: जुआ खेलते 9 लोग रंगे हाथों गिरफ्तार

Related Post

rns featured image new
  • उत्तराखंड
  • देहरादून

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम पुष्कर सिंह धामी ने स्व. जसपाल राणा को दी श्रद्धांजलि

RNS INDIA NEWS 24/06/2026 0
rns featured image new
  • उत्तराखंड
  • देहरादून

उत्तराखंड के सभी थानों को बम से उड़ाने की धमकी, हरियाणा के युवक पर केस

RNS INDIA NEWS 23/06/2026 0
rns featured image new
  • उत्तराखंड
  • देहरादून

उत्तराखण्ड में डेटा-लिंक्ड गवर्नेंस की दिशा में कदम, मुख्य सचिव ने कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण डेटा व तकनीक पर दिया जोर

RNS INDIA NEWS 22/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 25 जून
  • स्याना चट्टी में निर्माणाधीन बैली ब्रिज की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
  • बढ़े बिजली बिलों पर भड़के चौड़ा के ग्रामीण
  • वित्तीय अनुशासन के लिए डीडीओ व वित्त अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित
  • समूह ‘ग’ परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग शुरू
  • अल्मोड़ा में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा, प्रभारी सचिव ने रिस्पांस टाइम घटाने पर दिया जोर
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.