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  • देहरादून

बस-टैक्सी कारोबार पर लगा ब्रेक, पिछले साल के नुकसान से गाड़ी पटरी पर नहीं लौटी

RNS INDIA NEWS 01/05/2021
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देहरादून। बढ़ता कोरोना संक्रमण सिटी बस, टैक्सी, मैक्सी कैब मालिक और उनके ड्राइवरों पर भारी पड़ रहा है। पिछले साल हुए नुकसान के बाद किसी तरह गाड़ी पटरी पर लौट रही थी कि कोरोना की दूसरी लहर मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है। सिटी बसों के पहिए जाम हो गए हैं। टैक्सी और मैक्सी वाहन भी बहुत कम संख्या में चल रहे हैं। कुछ वाहन मालिकों ने पिछले साल अपने ड्राइवरों को नौकरी से हटा दिया था तो कुछ अब हटाने लगे हैं। कुछ इंतजार में हैं कि कोराना कफ्र्यू खुलेगा तो काम चलेगा। बड़ा संकट ड्राइवरों के सामने खड़ा हो गया है। सिटी बसों के कुछ ड्राइवर मजदूरी तक करने लगे हैं। मालिकों के सामने वाहनों टैक्स और बीमा किस्त जमा करने की चुनौती बनी हुई है। उनका कहना है कि जब काम नहीं है तो टैक्स और बीमा किस्त कहां से जमा करवा पाएंगे। बस-टैक्सी कारोबारियों का कहना है कि पर्यटन सीजन कोरोना की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। चारधाम यात्रा स्थगित होने से भी कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा। आने वाले दिनों में और मुश्किल होने वाली है। संचालक पिछले साल के संकट से अभी ठीक से नहीं उबर पाए हैं। अब फिर से उनके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई।

मसूरी टैक्सी स्टैंड:टैक्सी ड्राइवरों को नहीं मिल पा रहा काम
दून टैक्सी ऑनर्स एसोसिएशन की टैक्सियों का संचालन रेलवे स्टेशन स्थित मसूरी टैक्सी स्टैंड से होता है। उपाध्यक्ष खलिक अहमद ने बताया कि एसोसिएशन के पास 300 टैक्सियां हैं। करीब 50 मालिकों ने ड्राइवर रखे हैं। मैंने भी खुद ड्राइवर रखा था, जिसे काम नहीं होने पर पिछले साल हटा दिया था। आजकल दिनभर में स्टैंड से एक-दो टैक्सियां चल पा रही हैं। बाकी सभी खड़ी हैं। ड्राइवर दीपक पांडेय ने बताया कि वह एक साल से दिहाड़ी पर चल रहा है। आजकल सुबह स्टैंड पर आता हूं और शाम को खाली हाथ घर लौट जाता हूं। टैक्सी का काम लगभग ठप हो चुका है। ड्राइवर विनोद की भी कमोबेश यह स्थिति है। उनको भी काम नहीं मिल पा रहा है।

आईएसबीटी: कर्फ्यू समाप्त होने का इंतजार कर रहे मालिक
यहां से विकासनगर-डाकपत्थर के लिए बसें चलती हैं। रोजाना इस रूट पर करीब 150 बसें चलती हैं, लेकिन कोरोना कफ्र्यू के कारण सभी के पहिए जाम हैं। यूनियन के प्रधान रामकुमार सैनी ने बताया कि एक साल से काम नहीं हैं। अधिकांश मालिक खुद अपनी बसें चला रहे हैं। बावजूद इसके खर्चे नहीं निकल पा रहे हैं। अभी एक सप्ताह का कफ्र्यू है। यदि बढ़ता है तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी, मालिकों को ड्राइवर हटाने पड़ेंगे। टैक्स और बीमा किस्त देनी मुश्किल हो रखी है। उन्होंने सरकार से कम से कम दो साल का टैक्स माफ करने की मांग की है। इस रूट के ड्राइवर अभिषेक ने बताया कि दो दिन से बसों का संचालन ठप है।

इंदिरा मार्केट स्टैंड:सरकार टैक्सियों का टैक्स माफ करे
यहां टैक्सियों की भीड़ न के बराबर है। सवारियों के इंतजार में ड्राइवरों के चेहरे पर मायूसी साफ दिख रही। उत्तरकाशी जाने वाली एक टैक्सी में दो सवारियां बैठी थीं। धनोल्टी निवासी ड्राइवर सरताज गुसाईं ने बताया कि पिछले साल ही ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ था। अब फिर से वही स्थिति हो गई है। दो-तीन सवारियों पर उत्तरकाशी जाना पड़ रहा है। इसमें डीजल का भी खर्चा नहीं उठ पा रहा। नैनबाग के आनंद सिंह का कहना है कि टैक्सियों को काम नहीं मिल पा रहा है। सरकार को कम से कम तीन महीने का टैक्स माफ कर देना चाहिए।

परेड ग्राउंड:मजदूरी करने लगे हैं सिटी बसों के ड्राइवर
परेड ग्राउंड के आसपास से सिटी बसें चलती हैं, लेकिन आजकल सभी बसें तिब्बती मार्केट के सामने खड़ी हैं। कुछ मालिकों ने अपने घर के पास खड़ी कर रखी हैं। महानगर सिटी बस महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल का कहना है कि सिटी बस के मालिक एक साल से परेशान हैं। मेरी खुद की दो बसें हैं। ड्राइवर और कंडक्टर को रोजाना की दिहाड़ी दी जाती है। आजकल काम नहीं है तो वह घर चले गए हैं। हमारा एक ड्राइवर राहुल मजदूरी कर रहा है। यह नौबत न केवल बस ड्राइवरों के सामने है, बल्कि सिटी बस मालिकों के सामने भी है।

रिस्पना पुल स्टैंड:पचास फीसदी सवारी में संचालन मुश्किल
यहां से उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, चमोली, हरिद्वार, कोटद्वार के लिए मैक्सी कैब चलती हैं, लेकिन जब से सरकार ने 50 फीसदी सवारी का आदेश किया है, सवारियां कम हो गई हैं। ड्राइवर राजेंद्र नेगी ने बताया कि बहुत मुश्किल हो रही है। आधी सवारी में कब तक चलाएंगे, इससे अच्छा तो गाड़ी ही खड़ी कर दें। आजकल वैसे भी सवारी की दिक्कत हो रही है। हमें खुद को भी बचाना है और काम भी करना है। ड्राइवर बिलाल अहमद बताते हैं कि वह कोटद्वार और नजीबाबाद के लिए सवारी ले जाते हैं। इस समय काम की काफी समस्या हो गई है। सरकार किराया बढ़ाने नहीं दे रही और आधी सवारी से हमारा खर्चा नहीं चलता। हमारे सामने बहुत ज्यादा मुसीबत है।

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