

हरिद्वार(आरएनएस)। सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार को श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की ओर से मां गंगा के तट स्थित भैरव घाट पर ब्रह्मलीन संतों, गुरु मूर्तियों और सिद्ध महात्माओं का विधि-विधान से तर्पण एवं पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संतों ने जलांजलि और पुष्पांजलि अर्पित कर गुरु परंपरा के महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उत्तराखंड की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए भी विशेष प्रार्थना की गई। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज की अध्यक्षता में आयोजित अनुष्ठान में संत-महंतों ने भाग लिया। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि सर्वपितृ अमावस्या केवल पितरों के स्मरण का पर्व नहीं है, बल्कि संन्यास परंपरा के उन ब्रह्मलीन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है, जिन्होंने अपना जीवन तप, त्याग, साधना, धर्मरक्षा और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया। गुरु मूर्तियों का स्मरण सनातन परंपरा की आत्मा है। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का विकास पूरे राष्ट्र की समृद्धि से जुड़ा है। संत समाज ने मां गंगा से प्रदेश में सुख-शांति, सुरक्षा और आधुनिक विकास की कामना की। हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर वीरेंद्र आनंद गिरि महाराज ने कहा कि गंगा तट पर किया गया तर्पण सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। गुरु परंपरा के आशीर्वाद से धर्म और मानवता का कल्याण संभव है। इस दौरान संतों ने भगवान बदरीविशाल, बाबा केदारनाथ, मां गंगा, यमुना, धारी देवी और नंदा देवी सहित उत्तराखंड के देवी-देवताओं से प्रदेश में छह लेन राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, चारधाम यात्रा मार्गों के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षित पर्वतीय मार्गों, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के विस्तार की मंगलकामना की। अनुष्ठान के समापन पर मां गंगा की आरती कर उत्तराखंड, देश और विश्व के कल्याण की प्रार्थना की गई। इस अवसर पर श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत कंचन गिरि महाराज, श्रीमहंत शिवानंद सरस्वती महाराज, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, पुजारी भास्कर पुरी, पुजारी दिवाकर पुरी, दीपक गिरि महाराज सहित जूना अखाड़े के थानापति और बड़ी संख्या में संत-महंत उपस्थित रहे।



