
हरिद्वार। शनिवार को धूमधाम के साथ भाई दूज का त्यौहार मनाया जायेगा। आमतौर पर यह त्यौहार कार्तिक माह में पड़ता है जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भाई बहन के पावन प्रेम का पर्व भाई दूज रक्षा बंधन की ही तरह एक बड़ा पर्व है।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र व स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं और उनकी आरती उतारती हैं। भाई सदैव बहन की रक्षा करने का वचन देता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार भाई दूज के दिन बहन के तिलक का विशेष महत्व होता है। भाई दूज को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है, देवी यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थीं लेकिन वे दोनों लंबे समय तक मिल नहीं पाते थे। एक बार यम अचानक दिवाली के बाद बहन यमुना से मिलने पहुंच गए। खुशी में यमुना ने तमाम तरह के पकवान बनाए और भाई यम के माथे पर तिलक किया। इससे खुश होकर उन्होंने यमुना से वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना ने अपने भाई से कहा कि वे चाहती हैं कि यम हर साल उनसे मिलने आएं और आज के बाद जो भी बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करे उसे यमराज का डर न रहे। यमराज ने यमुना को ये वरदान दिया और उस दिन से भाई दूज का त्यौहार मनाया जाने लगा। ऐसी मान्यता है कि जो बहनें अपने भाई के तिलक करती हैं उनकी उम्र लंबी होती है।

