

रुद्रप्रयाग(आरएनएस)। द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रविवार को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से सभा मंडप में विराजमान किया गया। इस दौरान स्थानीय हक-हकूकधारियों ने भगवान को नए अनाज का भोग (छाबड़ी) अर्पित किया।
रविवार सुबह साढ़े आठ बजे रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया। इस दौरान मंदिर के वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, नवीन मैठाणी और केदार लिंग ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया और ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी शिवलिंग और वागेश लिंग ने भोग मूर्तियों को सभा मंडप में विराजमान कराया। रावल भीमाशंकर लिंग ने मद्महेश्वर के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग को छह माह की पूजा का संकल्प दिलाया। इसके बाद सभा मंडप में पंच गौंडार की मौजूदगी में पुजारी शिवशंकर लिंग ने भगवान को भोग अर्पित कर आरती कराई। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में उदयपुर, मस्तोली, ब्राह्मणखोली और डंगवाड़ी की महिलाओं ने नए अनाज से तैयार छाबड़ी भगवान को अर्पित की। मद्महेश्वर की भोग मूर्तियां सोमवार को भी सभा मंडप में विराजमान रहेंगी। 19 मई को सुबह सात बजे मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली अपने मूल मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी तथा रात्रि प्रवास के लिए रांसी स्थित राकेश्वरी मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद 20 मई को डोली गौंडार पहुंचेगी और 21 मई को गौंडार गांव से प्रस्थान कर मद्महेश्वर पहुंचेगी। इसी दिन पूर्वाह्न 11:30 बजे ग्रीष्मकाल के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रहलाद पुष्पवान, मंदिर प्रबंधक विजेंद्र बिष्ट, डोली प्रभारी कृष्ण त्रिवेदी, देवी प्रसाद तिवारी, सभासद सरला रावत, देवानंद गैरोला और दिनेश गोसाईं आदि मौजूद रहे।

