


अल्मोड़ा। उत्तराखंड की पारंपरिक ताम्र शिल्प कला के संरक्षण और इससे जुड़े कारीगरों की आजीविका को मजबूत बनाने के लिए ग्राम सल्ला (दीनापानी), कसारदेवी में पोस्ट-जीआई कॉपर क्राफ्ट क्लस्टर परियोजना का शुभारंभ किया गया। शुक्रवार को शुरू हुई इस परियोजना के माध्यम से अल्मोड़ा और बागेश्वर के पारंपरिक ताम्र शिल्प को नई पहचान दिलाने, कारीगरों के कौशल विकास और उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। यह परियोजना उम्मीद फाउंडेशन-होप फॉर ह्यूमन की ओर से नाबार्ड, उत्तराखंड के ग्रामीण एमएसएमई कार्यक्रम के तहत जीआई से संबंधित गतिविधियों के लिए मिली वित्तीय सहायता से संचालित की जा रही है। परियोजना को 18 माह के लिए स्वीकृति दी गई है। परियोजना के तहत दोनों जिलों के पारंपरिक ताम्र शिल्प क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने के साथ कारीगरों की दक्षता और क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने तथा विपणन को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाएगा। कारीगरों को ई-कॉमर्स सहित विभिन्न बाजार माध्यमों से जोड़ने की भी योजना है, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके। उत्तराखंड की ताम्र शिल्प कला राज्य की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से स्थानीय कारीगर इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं। बदलते बाजार और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस कला के संरक्षण के साथ कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक जी.सी. पंत, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के एच.सी. बजेठा, उम्मीद फाउंडेशन के ललित मेहरा, परियोजना समन्वयक भुवन बोरा और स्टार ग्लोबल फाउंडेशन के रमेश बिष्ट मौजूद रहे।




