Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सऊदी अरब और तुर्की में बढ़ रही दोस्ती, प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जाएंगे अंकारा
  • अंतरराष्ट्रीय

सऊदी अरब और तुर्की में बढ़ रही दोस्ती, प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जाएंगे अंकारा

RNS INDIA NEWS 23/06/2022
rns featured image new

काबुल। इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्यिक दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की 2018 में हत्या के बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान तुर्की के दौरे पर जा रहे हैं। प्रिंस सलमान का यह दौरा तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन के रियाद दौरे के के एक महीने के बाद हो रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एर्दोगन का अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में से एक के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करना मजबूरी है। एर्दोगन का यह फैसला बड़े पैमाने पर इकॉनमी और ट्रेड से प्रेरित है। आम चुनाव से एक साल पहले तुर्की के जीवन स्तर में गिरावट आ रही है जो एर्दोगन के दो दशक के शासन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के तुर्की विशेषज्ञ सोनर कैगाप्टे ने कहा है कि एर्दोगन सिर्फ खुद के बारे में सोच रहे हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने तुर्की और खुद के गौरव को मिटाकर भी चुनाव जीतना चाहते हैं। लेकिन यह सिर्फ तुर्की के बारे में नहीं है। सऊदी अरब ईरान की गतिविधियों को लेकर चिंतित है। ऐसे में वह तुर्की को अपने पाले में रखना चाहता है।

कैसे बिगड़े दोनों देशों के बीच संबंध
सउदी के साथ तुर्की की समस्याएं तब शुरू हुईं जब अंकारा ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के 2013 में काहिरा में मुस्लिम ब्रदरहुड को सत्ता से हटाने को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सउदी और अन्य अरब राज्यों ने ब्रदरहुड को अस्तित्व के लिए एक खतरे के रूप में देखा था। 2017 में कतर पर सउदी और उनके सहयोगियों द्वारा लगाए गए लगभग चार साल के नाकेबंदी को तोडऩे की कोशिश के बाद ये प्रतिद्वंद्विता तेज होती गई।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: समुद्र में डूबा हांगकांग का मशहूर तैरता रेस्तरां, 46 साल से खिला रहा था खाना
Next: नैनो यूरिया के इस्तेमाल पर दिया जोर

Related Post

rns featured image new
  • अंतरराष्ट्रीय

मोजतबा खामेनेई के रूस में इलाज की अटकलें, आधिकारिक पुष्टि नहीं

RNS INDIA NEWS 16/03/2026 0
rns featured image new
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय

महंगी पड़ेगी ट्रंप की दोस्ती, रूस से तेल न खरीदने की शर्त से भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

RNS INDIA NEWS 10/02/2026 0
rns featured image new
  • अंतरराष्ट्रीय

चीन ने बनाई शरीर की नस-नस दिखाने वाली मशीन

RNS INDIA NEWS 23/01/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 17 जून
  • सहसपुर में स्वारना नदी के किनारे फेंका जा रहा कूड़ा
  • कमला नेहरू पुरस्कार समारोह में 170 मेधावी विद्यार्थियों की माताएं सम्मानित
  • इकबालपुर रेलवे फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से युवक की मौत
  • सांसद नरेश बसंल ने सुनी व्यापारियों और क्षेत्रवासियों की समस्याएं
  • महिला इंजीनियर की मौत मामले में जांच की मांग उठी
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.