
विकासनगर। चकराता छावनी स्थित पशु चिकित्सालय में डाक्टर की तैनाती न होने से स्थानीय पशुपालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों को बीमार होने पर पशुओं को विकासनगर ले जाना पड़ रहा है। चकराता के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पशुपालन करते हैं। क्षेत्र का केंद्र बिंदु चकराता होने के चलते बड़ी संख्या में लोग रोजाना चकराता आते हैं। साथ ही आसपास कोई और पशु चिकित्सालय न होने के कारण लोगों को अपने पशुओं का इलाज कराने के लिये चकराता लाना पड़ता है। लेकिन एक माह पूर्व चकराता के पशु चिकित्सक का तबादला कहीं और हो जाने से पशुपालकों के पशुओं का उपचार नहीं हो रहा है। चकराता के पशु चिकित्सक चार्ज यहां से 50 किलोमीटर दूर स्थित कांडोई भरम चिकित्सालय के चिकित्सक को दिया गया है। जिनका यहां आना संभव नहीं होता है। लिहाजा पशुपालक अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए भटकते रहते हैं। स्थानीय पशुपालक दिगंबर चौहान, सतपाल सिंह, भगतराम, बहादुर सिंह, पंकज चौहान, परम सिंह, महेंद्र राणा, कुंदन सिंह आदि का कहना है कि चकराता स्थित पशु चिकित्सालय ब्रिटिश कालीन है। उस समय सिर्फ देहरादून मसूरी और चकराता में ही पशु चिकित्सालय था। लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते यहां व्यवस्था बदहाल है। ग्रामीणों को अपने बीमार पशुओं का उपचार करने के लिए 50 से 80 किमी की दूरी तय कर विकासनगर ले जाना पड़ता है, जिसमें व्यावहारिक तौर पर कई दिक्कतें आती हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई बार पशुओं की मौत हो जाती है। उधर, पशुपालन विभाग के निदेशक प्रेम कुमार ने बताया कि जल्द ही चकराता अस्पताल में पशु चिकित्सक की तैनाती कर दी जाएगी।

