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रेमडेसिविर कोरोना के इलाज की रामबाण दवा नहीं है और न ही यह जीवन रक्षक दवा

RNS INDIA NEWS 26/04/2021
remdesivir

ऋषिकेश। रेमडेसिविर को लेकर देशभर में हो रही मारामारी के बीच एम्स के चिकित्सकों ने इस संबंध में महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विशेषज्ञ चिकित्सकों को कहना है कि रेमडेसिविर कोरोना के इलाज की रामबाण दवा नहीं है और न ही यह जीवन रक्षक दवा है। यह ठीक उसी तरह से कोविड के लक्षणों और बुखार को कम करने के काम आती है, जिस प्रकार पैरासिटामोल दवा काम आती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के कोविड नोडल अधिकारी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीके पण्डा ने जन सामान्य को सलाह दी है कि रेमडेसिविर की उपलब्धता नहीं होने पर परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि रेमिडेसिविर कोविड के उपचार का यह अंतिम विकल्प नहीं है। कोविड पॉजिटिव रोगी को सबसे पहले को-मोर्बिलिटीज डिसीज का समय रहते उपचार करने पर ध्यान देना चाहिए। जरूरी यह है कि कोविड के लक्षण आने के बाद उपचार की निम्न तीन प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में अपनाई जाए। उत्तराखंड में रविवार को 4368 और लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं।

पहला चरण: प्रथम सात दिनों में क्या करें
-अगले 15 दिनों के लिए प्रतिदिन टेबलेट विटामिन-सी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार शुरू करें।
-बुखार की शिकायत होने पर टेबलेट पैरासिटामोल-650 एमजी का दिन में चार से छह बार दो से तीन दिनों तक सेवन करें।
-कोल्ड संबंधी दिक्कत होने पर टेबलेट मॉन्टेलुकास्ट-लेवो-सिट्रीजिन का दैनिक उपयोग करें।
-संक्रमित होने की स्थिति में पूरी तरह बेड रेस्ट आवश्यक है।
-मानसिक तनाव और भय से पूरी तरह मुक्त रहें।
-ज्यादा से ज्यादा पानी का इस्तेमाल करें और आसानी से पचने वाले तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
-छाती के बल लेटने (प्रोनिंग पोजिशन) से इसमें आराम मिलता है। यह सभी उपाय कोविड के लक्षण आने के सात दिनों के भीतर किए जाने बहुत जरूरी हैं, जिससे कि मरीज को समय पर लाभ मिल सके और बीमारी अगले चरण में गंभीर रूप न ले पाए।

दूसरा चरण: एक सप्ताह बाद यह अपनाएं सुरक्षा
इस चरण को जीवन रक्षक (लाइफ सेविंग) ट्रीटमेंट कहा जाता है। इस चरण में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अगले सात दिन (इम्योनॉलोजिकल फेज) साईटोकाईन स्ट्रोन के दौरान समय रहते चेस्ट एक्सरे, चेस्ट सीटी स्कैन, कम्लीट ब्लड काउंट टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), सीआरपी, डी-डायमर, एलडीएच टेस्ट अनिवार्यरूप से कराए जाने चाहिए। इन तमाम परीक्षणों से शरीर में वायरस की घातकता का पता चलता है।इसके अलावा रोगी के शरीर का कौन-कौन सा अंग किस स्तर पर संक्रमित हो चुका है, इसका भी पता चल जाता है। एम्स के नोडल ऑफिसर कोविड डॉ. पीके पण्डा ने बताया कि यदि सही समय पर रोगी को ऑक्सीजन, डेक्सोना, हेपारिन और प्रोनिंग लग जाए तो उसका जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि इन परीक्षणों के अलावा कोविड संक्रमण की सही स्थिति जानने के लिए दैनिक रूप से रोगी के शरीर की विभिन्न निगरानी करने की जरूरत होती है। इनमें पल्स रेट (नाड़ी दर), ब्लड प्रेशर, रेसपिरेटरी रेट (सांस की गिनती), शरीर का तापमान और ऑक्सीजन सेचुरेशन आदि की निगरानी शामिल है।

तीसरा चरण: रिकवरी के 14 दिनों के बाद
लॉग कोविड सिंड्रोम (या पोस्ट-कोविड स्थिति) ऐसे लक्षणों की एक सीमा होती है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद, आमतौर पर संक्रमण के चार सप्ताह बाद तक रह सकता है। कोविड लंबे समय तक किसी को भी हो सकता है। इसके लक्षण न्यूनतम भी हो सकते हैं और यह बिना लक्षणों के भी लंबे समय तक रह सकता है। इस दौरान जल्दी ठीक होने के लिए रोगी को सांस लेने के व्यायाम और शारीरिक व्यायाम पर ध्यान देने की बहुत जरूरत होती है। मीडिया में उपलब्ध वीडियो अथवा उपलब्ध जानकारियों के माध्यम से इस प्रकार के व्यायाम सीखे जा सकते हैं या चिकित्सकों से भी परामर्श लिया जा सकता है।

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