
देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए एमबीबीएस में दाखिला दिलाने वाले गिरोह के दो और आरोपियों को एसआईटी ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक तहसील परिसर स्थित सुलभ शौचालय का कर्मचारी है। एसआईटी को जांच के दौरान तहसील में उसकी गतिविधियों और संपर्कों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि साक्ष्य जुटाने के बाद संजय कुमार, मूल निवासी सारनाथ, बनारस और हाल निवासी डालनवाला तथा गिरीश सिंह, मूल निवासी पिथौरागढ़ और हाल निवासी गढ़ी कैंट को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि संजय दून तहसील परिसर की बिल्डिंग में सुलभ शौचालय का संचालन करता है और दिनभर परिसर में मौजूद रहता था। एसआईटी अब इस पहलू की जांच कर रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के लिए संजय तहसील के किन अधिकारियों या कर्मचारियों के संपर्क में था।
गिरीश देहरादून में मोबाइल और सिम बेचने की दुकान चलाता है। उसका पार्टनर कई सीएससी सेंटर संचालकों से जुड़ा बताया गया है। एसआईटी के अनुसार दोनों आरोपियों ने स्वाति, परी और खुशी के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
गिरीश के मोबाइल में मिले एडिटिंग सॉफ्टवेयर
एसआईटी प्रभारी एसपी देहात जया बलोनी ने बताया कि गिरीश के मोबाइल से एडिटिंग सॉफ्टवेयर मिले हैं। गिरोह के सदस्य छात्रों की जानकारी भेजते थे, जिसके आधार पर इन सॉफ्टवेयर की मदद से आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर स्थायी निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए जाते थे। एसआईटी के अनुसार जाली दस्तावेज उपलब्ध कराने में दोनों आरोपियों की अहम भूमिका थी।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी वर्ष 2007 से एक-दूसरे को जानते हैं। वे पूर्व में गिरफ्तार भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव और गिरोह के एक अन्य फरार सदस्य के संपर्क में भी थे।
क्लेमनटाउन थाने का मामला अब भी लंबित
फर्जीवाड़े के मामले में 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। एसआईटी की अब तक की कार्रवाई रायपुर थाने में दर्ज मुकदमे से जुड़े गिरोह तक सीमित है। इस मामले में अब तक पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। वहीं क्लेमनटाउन थाने में दर्ज मुकदमे में पुलिस अभी किसी आरोपी को ट्रेस नहीं कर पाई है।

