
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में नवजात शिशुओं के उपचार के लिए आधुनिक मशीनों की स्थापना से गंभीर मामलों में उपचार की सुविधा बेहतर हुई है। अस्पताल के अत्याधुनिक एनआईसीयू में स्थापित इंक्यूबेटर और थेराप्यूटिक हाइपोथर्मिया मशीन नवजातों के जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विभागाध्यक्ष एवं नवजात शिशु सुपरस्पेशलिस्ट (डीएम) डॉ. सुमित जीना ने बताया कि इंक्यूबेटर का उपयोग विशेष रूप से समय से पूर्व जन्मे और कम वजन वाले नवजातों के उपचार में किया जाता है। 28 से 30 सप्ताह में जन्मे तथा एक किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। इंक्यूबेटर में तापमान और ह्यूमिडिटी नियंत्रित रखकर बच्चों को हाइपोथर्मिया से बचाने में मदद मिलती है। जरूरत के अनुसार नवजात को करीब दो सप्ताह तक इस मशीन में रखा जाता है और ह्यूमिडिटी को धीरे-धीरे कम किया जाता है। थेराप्यूटिक हाइपोथर्मिया मशीन का इस्तेमाल ऐसे नवजातों के उपचार में किया जाता है, जो जन्म के तुरंत बाद नहीं रोते हैं। डॉ. जीना के अनुसार इसके लिए बच्चे का वजन दो किलोग्राम से अधिक, गर्भ अवधि 35 सप्ताह या उससे अधिक और जन्म के छह घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है। मशीन के माध्यम से बच्चे के मस्तिष्क और पूरे शरीर को 72 घंटे तक नियंत्रित तरीके से ठंडा रखा जाता है। इस दौरान तापमान करीब 33.5 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने के बाद धीरे-धीरे सामान्य किया जाता है। डॉ. जीना ने बताया कि नियंत्रित कूलिंग से मस्तिष्क का मेटाबॉलिज्म कम करने और विषैले पदार्थों के निर्माण को घटाने में मदद मिलती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में सहायता मिलती है। बेस अस्पताल में इन मशीनों की सुविधा शुरू होने से अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों के नवजातों को उपचार के लिए बेहतर सुविधा मिल रही है। अस्पताल के प्राचार्य डॉ. तितियाल ने कहा कि भविष्य में अस्पताल में और बेहतर चिकित्सा मशीनें उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि क्षेत्रवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।



