
अल्मोड़ा। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दलीप सिंह बोरा के आठवें काव्य संग्रह ‘पहाड़’ का लोकार्पण रविवार को साहित्यिक संस्था छंजर सभा के तत्वावधान में आयोजित समारोह में किया गया। साहित्यकारों ने संग्रह को पहाड़, समाज और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य नीलम नेगी ने की, जबकि वरिष्ठ पत्रकार एवं रंगकर्मी नवीन बिष्ट मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन छंजर सभा के सदस्य नीरज पंत ने किया। मंचासीन अतिथियों ने डॉ. बोरा के नवीन काव्य संग्रह में शामिल कविताओं की विषयवस्तु, भाषा और संवेदनशील अभिव्यक्ति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। डॉ. दलीप सिंह बोरा ने अपने नवीन काव्य संग्रह ‘पहाड़’ में 52 कविताओं का संकलन किया है, जिनमें पहाड़, प्रकृति, समाज और समकालीन जीवन से जुड़े विविध विषयों को अभिव्यक्ति दी गई है। पुस्तक की भूमिका सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं हिंदी विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने लिखी है। डॉ. बोरा ने यह काव्य संग्रह अपनी माता स्वर्गीय श्रीमती गोविन्दी देवी तथा पिता स्वर्गीय राम सिंह बोरा को समर्पित किया है। डॉ. बोरा वर्तमान में अल्मोड़ा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में सहायक महाप्रबंधक (प्रबंधन) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पूर्व उनके हिंदी काव्य संग्रह ‘आवाज’ और ‘बहस’ तथा कुमाऊँनी काव्य संग्रह ‘बखताक हाल’, ‘मनकसि’, ‘कणक’, ‘मेरि थात’ और ‘हिमाव’ प्रकाशित हो चुके हैं। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में नवीन बिष्ट, नीलम नेगी, डॉ. रमेश लोहुमी, डॉ. धारा बल्लभ पांडेय, धुव टम्टा, नीरज पंत, कंचन तिवारी, विपिन जोशी, कमला बिष्ट, डॉ. ललित जोशी, दिनेश चंद्र पांडेय, भुवन चंद्र मिश्रा, सुनील चौहान सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। समारोह के अंत में छंजर सभा के संरक्षक त्रिभुवन गिरी महाराज एवं संयोजक डॉ. रमेश लोहुमी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


