
देहरादून। नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित खतरों के प्रति सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की नियमित वैज्ञानिक निगरानी, व्यापक सर्वेक्षण और जोखिम वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन प्रणालियों का विस्तार भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का चरणबद्ध वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास की भौगोलिक स्थिति और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाए। साथ ही आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और प्रभावी संचार प्रणाली विकसित कर समय रहते लोगों तक चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग, संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हांकन, स्थानीय चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
इसी क्रम में राज्य सलाहकार समिति (आपदा प्रबंधन) के उपाध्यक्ष विनय रुहेला और लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रघुवीर सिंह भंडारी ने सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर ग्लेशियर झीलों, नदियों के जलस्तर, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार नेटवर्क और आपदा प्रतिक्रिया की तैयारियों का जायजा लिया। जिलाधिकारियों को संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और किसी भी असामान्य गतिविधि की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रदेश में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जिनमें से चार का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। शेष झीलों का भी चरणबद्ध अध्ययन किया जाएगा। जल्द ही चमोली के सरस्वती ताल और उत्तरकाशी के केदारताल का विशेषज्ञ दल द्वारा सर्वेक्षण कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार रियल टाइम मॉनिटरिंग, आधुनिक सेंसर, वैकल्पिक संचार प्रणाली और स्थानीय प्रशासन की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरों और आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रदेश की नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए तथा डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते अलर्ट किया जाए। अधिकारियों ने नेपाल की हालिया आपदा से सीख लेते हुए स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र और त्वरित संचार व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।

