
रुद्रपुर(आरएनएस)। राजकीय इंटर कॉलेज शांतिपुरी में मंगलवार को जागरूकता एवं गाजर घास उन्मूलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता शस्य विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एवं परियोजना अधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को गाजर घास से होने वाले नुकसान और उसके नियंत्रण की जानकारी दी। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शस्य विज्ञान विभाग की ओर से अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन शोध परियोजना के तहत आयोजित 21वें गाजर घास जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि गाजर घास मूल रूप से उत्तरी और मध्य अमेरिका का पौधा है, जो 1950 के दशक में भारत पहुंचा और तेजी से देशभर में फैल गया।यह फसलों की पैदावार प्रभावित करने के साथ मनुष्यों में त्वचा रोग, दमा और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। पशुओं के लिए भी यह हानिकारक है। बताया कि फूल आने से पहले गाजर घास को जड़ समेत उखाड़कर गड्ढे में दबाकर कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट बनाया जा सकता है। इसके जैविक नियंत्रण के लिए जाइगोग्रामा बाइकोलोराटा बीटल का उपयोग किया जाता है। अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. बीसी भट्ट ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के माध्यम से समाज तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और परियोजना से जुड़े कार्मिकों ने भाग लिया।

