
देहरादून। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच मंगलवार को विजिलेंस ने कृषि विभाग से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में रिश्वतखोरी के आरोप में दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया। एक अधिकारी पर कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में फूलों की खेती के लिए मिलने वाले सरकारी अनुदान की प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते सहायक कृषि अधिकारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
जानकारी के अनुसार, दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने जांच की। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपियों को रिश्वत की रकम लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। दोनों मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एक ही दिन में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी ने सरकारी विभागों में हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई इस बात की भी ओर इशारा करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई बार लाभार्थियों को फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग का सामना करना पड़ता है। हालांकि ऐसे मामलों का खुलासा तभी हो पाता है, जब पीड़ित शिकायत दर्ज कराने का साहस जुटाते हैं।
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सब्सिडी और सरकारी अनुदान जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी रिश्वत देनी पड़े तो इससे योजनाओं की पारदर्शिता और उद्देश्य दोनों प्रभावित होते हैं।
प्रदेश में सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है और विजिलेंस भी समय-समय पर ट्रैप अभियान चलाकर रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार करती रही है। इसके बावजूद विभिन्न विभागों में रिश्वतखोरी के मामले सामने आते रहने से सरकारी कार्यालयों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों मामलों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और संबंधित विभाग भ्रष्टाचार रोकने तथा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

