
अल्मोड़ा। संयुक्त ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी आह्वान पर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की जिला इकाई ने विभिन्न श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी की और श्रमिक हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि व्यापार सुगमता के नाम पर लाई गई चार नई श्रम संहिताएं पूंजीपतियों के हित में हैं। उनका आरोप था कि इन कानूनों के जरिए श्रमिकों के संगठन बनाने, यूनियन गठित करने और अपने अधिकारों के लिए हड़ताल करने जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इन संहिताओं को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। श्रमिक नेताओं ने स्थायी रोजगार के स्थान पर ठेका प्रथा, अंशकालिक रोजगार, बाहरी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति और निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों का शोषण बढ़ रहा है और उन्हें संगठित होने से दूर किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने, सभी को स्थायी रोजगार देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने और संगठित व असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने की मांग उठाई। इसके अलावा बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण और श्रमिकों के बुनियादी एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग भी की गई। धरना-प्रदर्शन में ममता भट्ट, भगवती आर्य, हेमा अधिकारी, उमा देवी, पार्वती देवी, प्रेम जड़ौत, आरपी जोशी, उपेंद्र, अशोक पंत, प्रमोद तिवारी और योगेश टम्टा सहित विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे।
