
विकासनगर(आरएनएस)। महासू धाम हनोल में 25 गते सावन (रविवार) को महासू देवता की पवित्र कुंगवाड़ (फुलवारी) की विधि-विधान और गाजे-बाजे के साथ खुदाई-निड़ाई, गुड़ाई की गई। मंदिर के मुख्य गर्भगृह के पीछे स्थित इस पवित्र फुलवारी की खुदाई साल में सिर्फ एक दिन पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार की जाती है। कुगवाड़ की खुदाई का शुभारंभ नवाड़ परिवार के मुखिया जयेंद्र सिंह ने किया। इसके बाद ब्यूलाड़ के रावत परिवार, चातरा के नौटियाल बंधुओं, राजगुरु, पाशीबिल के ठाणी और महासू देवता के पारंपरिक कारिंदों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार कुगवाड़ की खुदाई की। इस दौरान मंदिर परिसर में गाजे-बाजे के साथ धार्मिक माहौल बना रहा।देवता की पवित्र कुगवाड़ में उगने वाले नगरास के फूल बेहद सुंदर होते हैं। इन फूलों का प्रयोग मंगशीर से फागुन मास तक लगभग तीन माह की अवधि में महासू देवता की पातरी पूजा में किया जाता है। कुगवाड़ की खुदाई और उसमें होने वाली फूलों की परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जा रही है। कुंगवाड़ की खुदाई के अवसर पर पुजारी हरिश्चंद्र नौटियाल, महाबीर रावत, मोहनलाल नौटियाल, रामलाल नौटियाल, नरेंद्र नौटियाल, हितेंद्र, राजू, नवीन, विक्र, राजगुरु, ज्योति चौहान मौजूद रहे।
