
लखनऊ (आरएनएस)। किन्नर मोहिनी ने आत्मनिर्भर होने के लिए स्वयं व्यवसाय करने का फैसला लिया। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) विकसित सहभागिता संस्था के सहयोग से मलिहाबाद में मुर्गी पालन व्यवसाय चुना। मोहिनी ही नहीं कई और लोग भी इस व्यवसाय से जुडक़र आत्मनिर्भर हो रहे हैं। मलिहाबाद के आम के बागों में मुर्गीपालन को व्यावसायिक बनाने के लिए संस्थान द्वारा फार्मर्स फस्र्ट प्रोजेक्ट के अंतर्गत भूमिहीन एवं छोटी जोत वाले किसानों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित की गई किस्में कारी निर्भीक, कारी देवेंद्र, कारी शील और कडक़नाथ को पालना शुरू किया। किन्नरों को अधिकतर अपने ही परिवार से विस्थापित होना पड़ता है। इनके साथ सामाजिक दुव्र्यवहार और अत्याचार भी होता है। पहली बार 2011 भारतीय जनगणना में ट्रांसजेंडर आबादी की गणना की गई जिसमें साढ़े चार लाख की आबादी बताई गई है। लेकिन अनुमान के मुताबिक संख्या 20 लाख के करीब है। किन्नर आज भी आधुनिकता के इस युग में परंपरागत पेशा कर जीवन यापन कर रहे हैं। संस्थान के फार्मर फस्र्ट परियोजना द्वारा आम के बगीचों में चलाये जा रहे मुर्गी पालन से प्रेरित होकर माल, मलिहाबाद प्रखंड की किन्नर 35 वर्ष की मोहिनी ने परंपरा से हटकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया, जो अन्य किन्नरों के लिए भी एक मिसाल है।
उन्होंने फार्मर फस्र्ट परियोजना से जुडक़र कडक़नाथ पोल्ट्री फार्म खोलने का मन बनाया। सहभागिता स्वयं सहायता समूह, मलिहाबाद से इसके बारे में प्रशिक्षण लिया। जिसमें कम लागत में बाड़ा बनाना, दाना बनाना तथा बीमारियों से बचाने का उपाय बताया गया।


