
अल्मोड़ा। राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड के षष्ठम द्विवार्षिक प्रांतीय अधिवेशन का शुभारंभ शुक्रवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट एवं जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) डॉ. रवि मेहता ने दीप प्रज्वलित कर किया। अधिवेशन के दौरान ‘राजकीय माध्यमिक शिक्षकों की सेवाकालीन चुनौतियां और राजकीय शिक्षक संघ की भूमिका’ विषय पर शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बदलते शैक्षिक परिवेश में शिक्षकों के सामने प्रतिदिन नई चुनौतियां आ रही हैं। लगातार पाठ्यक्रम में हो रहे बदलाव के कारण सेवाकालीन प्रशिक्षण की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही समयबद्ध पदोन्नति एवं स्थानांतरण नहीं होने से शिक्षकों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी नीति बनाए जाने पर जोर दिया गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि शिक्षक ही देश के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने शिक्षकों से नवाचारी तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने का आह्वान किया। जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) डॉ. रवि मेहता ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सभी शिक्षकों से सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता बताई।
गोष्ठी को मंडलीय अध्यक्ष रविशंकर गुसाईं, मंडलीय मंत्री भारतेंदु जोशी, जिला अध्यक्ष भूपाल सिंह चिलवाल, महिला उपाध्यक्ष मीनाक्षी जोशी, राजेंद्र खड़ायत, हुकम सिंह पलियाल, प्रधानाचार्य राजेश बिष्ट, भुवन जोशी, नीरज सचान, कपिल नयाल सहित अन्य शिक्षकों ने संबोधित किया।
अधिवेशन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष भूपाल सिंह चिलवाल ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री राजू महरा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, अल्मोड़ा के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की प्रस्तुति से हुई।
इस अवसर पर मंडलीय कोषाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, संयुक्त मंत्री प्रकाश भट्ट, पूर्व मंडलीय मंत्री डॉ. कैलाश डोलिया, पूर्व जिला अध्यक्ष हीरा सिंह बोरा, विनोद राठौर, दिनेश पंत, डॉ. दीप प्रकाश जोशी, धन सिंह धोनी, दीप पांडे, ललित पाठक, बृजेश डसीला, खुशहाल महर, नितेश काण्डपाल, त्रिभुवन सिंह, जीवन साह, देवेश सिंह, मोहन भट्ट, शिव दत्त पांडे, नवीन वर्मा, सुशील तिवारी, सविता जनौटी, डॉ. प्रकाश पंत, डॉ. बी.सी. पाण्डेय, अमित यादव, जीवन नेगी, भोला दत्त पंत, हीरा सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।


