
कोटद्वार(आरएनएस)। उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित वरिष्ठता विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आयोग से वर्ष 1994 में चयनित सहायक अध्यापक (एलटी) शिक्षकों को उनके अधिकार के अनुरूप वरिष्ठता दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन के 25 जनवरी 2024 के आदेश के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 9 जुलाई को गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशकों को वर्ष 1992 से 1996 तक नियुक्त एलटी शिक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। वरिष्ठ शिक्षक रूपचंद्र लखेड़ा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई उनकी ओर से दायर अवमानना याचिका के बाद की गई है। वर्ष 2005 में सीटी संवर्ग के शिक्षकों को नियमों के विपरीत पांच वर्ष की सेवा के बाद एलटी संवर्ग में समायोजन कर वरिष्ठता लाभ देने का निर्णय लिया गया था। नियमानुसार यह लाभ 10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद मिलना था जिससे आयोग से चयनित एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हुई और वे वर्षों तक पदोन्नति से वंचित रहे।अब विभाग ने स्पष्ट किया है कि सीटी संवर्ग के शिक्षकों को नियुक्ति के 10 वर्ष पूरे होने के बाद ही एलटी संवर्ग में वरिष्ठता का लाभ मिलेगा। वहीं आयोग से चयनित एलटी शिक्षकों की वैधानिक वरिष्ठता बहाल की जाएगी। शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि इससे लंबित पदोन्नतियां होंगी और विभागीय व्यवस्था में संतुलन स्थापित होगा।
