
देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड के सरकारी कॉलेजों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। यूपीईएस और उत्तराखंड सरकार की संयुक्त पहल के तहत पहले चरण में 45 प्रोफेसरों और सहायक प्रोफेसरों को एआई के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे चरण में 11 और 12 जुलाई को 90 और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।यूपीईएस परिसर में आयोजित तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षकों को पढ़ाई, शोध और अकादमिक नवाचार में एआई के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन यूपीईएस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिस (एआईटीओ) ने किया। इस पहल का उद्देश्य राज्य में एआई-रेडी शिक्षकों का नेटवर्क तैयार करना है, ताकि प्रशिक्षित शिक्षक अपने संस्थानों में अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी एआई आधारित शिक्षण से जोड़ सकें। इससे पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों का विस्तार होगा। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. संगीता गुप्ता, सहायक निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार डोबरियाल, यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस के निदेशक राहुल नैनवाल, सामाजिक सरोकार विभाग के प्रमुख लोकेंद्र दत्त शर्मा और डॉ. रक्षिता गोकुला मौजूद रहे।
समापन समारोह में अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, डॉ. संगीता गुप्ता, प्रो. प्रमोद कुमार डोबरियाल, यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय, प्रेसिडेंट डॉ. राम शर्मा और कुलसचिव मनीष मदान ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस दौरान यूपीईएस और उच्च शिक्षा विभाग के बीच इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए समझौता भी किया गया।कुलपति डॉ. सुनील राय ने कहा कि एआई अब शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और शिक्षकों को इस तकनीक से लैस करना भविष्य की आवश्यकता है।

