
देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने फर्जी स्थाई निवास जांच की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। आंदोलनकारियों का कहना था कि विशेषकर जो राज्य बनने के बाद रोजगार पर लगे हैं उनके निवास प्रमाण पत्र गहन जांच जरूरी है। शनिवार को आंदोलनकारी शहीद स्मारक में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, सुलोचना भट्ट, सत्या पोखरियाल ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाता है उस अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। महासचिव रामलाल खंडूड़ी, पूरण सिंह लिंगवाल ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य बनने का जो सपना आंदोलनकारियों ने देखा था कि राज्यवासियों को रोजगार व राज्य की योजनाओं का लाभ सीधे मिलेगा, वह सपना ही रह गया। क्योंकि जिस प्रकार लगातार फर्जी प्रमाण पत्र के माध्यम से नौकरियां, जमीनी खरीद फरोख्त एवं योजनाओं का लाभ लिया जा रहा है और खुलासा होने पर केवल उनके प्रमाणपत्र निरस्त किये जा रहें हैं। वह स्वीकार्य नहीं है। फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही, इसे राज्य आंदोलनकारी बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुष्पलता सिलमाणा, विशम्भर दत्त बौंठियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की पिछले 03-वर्षों की जांच की बात कहीं है। यह जांच वर्ष वार 2002 से प्रारम्भ होनी चाहिए। इसकी जगह मूलनिवास बनाने की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ होनी चाहिए। प्रदर्शन व ज्ञापन देने वालों में मुख्यतः केशव उनियाल, अरुणा थपलियाल, राधा तिवारी, मनोज नौटियाल, मोहन खत्री, हरी सिंह मेहर, सुरपाल सिंह, सुशील चमोली, राकेश नौटियाल, लोक बहादुर थापा, विनोद असवाल, हरी प्रकाश शर्मा, प्रभात डण्डरियाल, धनंजय घिल्डियाल, शकुन्तला देवी, तारा पाण्डे, रामेश्वरी नेगी, लक्ष्मी बिष्ट, शुभागा फर्स्वाण, संगीता रावत, यशोदा रावत, गोदावरी भट्ट, पुष्पा नेगी, दमयंती देवी, संम्पत्ति देवी, गीता नेगी, विक्रम सिंह राणा, यतींद्र नेगी, पुष्पा रावत, भुवनेश्वरी नेगी, रेणुका पंत, सुमति पडियार, सरोज कण्डवाल आदि मौजूद रहे।


